कुल्लू में चल रहे गोसदनों में अब हर गाय और बैल की होगी डिजिटल पहचान
गोसदन संचालकों को सरकार के भारत पशुधन पोर्टल पर करवाना होगा पंजीकरण
अधिकारी भी ऑनलाइन करेंगे सत्यापन, प्रक्रिया पूरी करने के बाद मिलेगी सहायता
गौरीशंकर
कुल्लू। जिले के गोसदनों में अब हर गाय और बैल की डिजिटल पहचान अनिवार्य हो गई है। सरकार ने भारत पशुधन पोर्टल पर पंजीकरण न करवाने वाले गोसदनों को सहायता राशि नहीं देने का निर्णय लिया है।
इसके तहत हर पशु के लिए 12 अंकों की विशेष आईडी मिलेगी। उपमंडल अधिकारी ऑनलाइन सत्यापन करेंगे। राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एनडीएलएम) के तहत पंजीकरण का उद्देश्य गोसदन संचालन में पारदर्शिता लाना और मवेशियों का सही डाटा एकत्रित करना है।
इसके लिए सरकार ने भारत पशुधन पोर्टल बनाया है। इसमें किसानों को अपने पशुओं का पंजीकरण करवाना जरूरी होगा। पंजीकरण पर हर पशु की एक 12 नंबरों की आईडी तैयार होगी। यह गोसदन संचालकों के लिए भी अनिवार्य कर दी गई है। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही सरकार की ओर से प्रति पशु पालने को लेकर दी जाने वाली सहायता राशि मिलेगी।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार गोसदन संचालकों को गाय पालने के लिए प्रति महीने 700 रुपये सहायता राशि देती थी। इसे बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया है। यह सहायता राशि अब उन गोसदनों को ही मिलेगी जिन्होंने अपने गो-सदन के हर पशुओं का पंजीकरण किया होगा।
जिले में गोसदन और उनकी क्षमता
जिला में 11 गोसदन हैं। इनमें 7 का संचालन किया जा रहा है। अभी 4 गोसदन बंद चल रहे हैं। इनमें मनाली के रांगड़ी में 70, कटराईं 500, कुल्लू के लंकाबेकर में 130, वाशिंग में 70, रायसन में 70, वैष्णो देवी में 250, बंदरोल के गोसदन में 250 मवेशियों के रखने की क्षमता है। जो चल रहे हैं, इन सात गोसदनों में 1210 गोवंश रखा गया है। बंजार के शलेरा सहित चार ऐसे गोसदन हैं जिनकी क्षमता 180 मवेशी रखने की है। ये बंद चल रहे हैं।
गोसदन चलाने वालों को अपने मवेशियों का पंजीकरण भारत पशुधन पोर्टल पर करवाना होगा। जिन्होंने पंजीकरण नहीं किया होगा, उन्हें सरकार से मिलने वाली सहायता नहीं मिलेगी। पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही होगी। अधिकारी भी ऑनलाइन सत्यापन करेंगे। - रवि ठाकुर, उप निदेशक पशु पालन विभाग कुल्लू