कुल्लू में दशहरा उत्सव के दौरान निकली भगवान नरसिंह की जलेब।-संवाद
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा देवी-देवताओं के मिलन का उत्सव होने के साथ देव समाज की समृद्ध संस्कृति, आपसी भाईचारे और पारंपरिक रिश्तों को मजबूत करने का भी अनूठा मंच है। उत्सव में जहां विभिन्न क्षेत्रों से आए देवी-देवता एक-दूसरे से मिलते हैं, वहीं उनके साथ जुड़े हारियान और कारकून भी आपस में मिलकर वर्षों पुरानी परंपराओं का निर्वहन करते हैं। देव-मानस मिलन की यह परंपरा कुल्लू की देव संस्कृति की विशिष्ट पहचान है।
देव समाज में देवी-देवताओं के साथ उनके हारियानों और कारकूनों की भूमिका भी अहम रहती है। देव आस्था से जुड़े ये लोग पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ आपसी संबंधों को भी सहेजते हैं। दशहरा उत्सव में अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे देवलू एक-दूसरे से मिलकर अपने पुराने संबंधों को ताजा कर रहे हैं। इस दौरान आपसी मेलजोल, सम्मान और सहयोग की भावना भी देखने को मिल रही है।
देव परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का माध्यम भी हैं। देव-मानस मिलन के जरिए लोगों का अपनी जड़ों, रीति-रिवाजों और सामुदायिक परंपराओं से जुड़ाव बना रहता है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में होने वाला यह मिलन देव समाज की एकजुटता और पीढ़ियों से कायम सामाजिक रिश्तों की जीवंत तस्वीर पेश करता है। संवाद