मान्यता ... जिस दिशा में गिरा बर्फ का गोला, वहां ओलावृष्टि से होता है फसलों को नुकसान
फागली उत्सव की धूम, भारी ठंड के बीच देवता के दर्शन करने के लिए उमड़े श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। माहुटी नाग के सम्मान में वीरवार को फागली उत्सव धूमधाम से मनाया गया। ठंड के बीच भारी तादाद में लोगों ने देवता के दर्शन किए और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।
फागली उत्सव का शुभारंभ देवालय से सुबह विशेष पूजा-अर्चना से हुआ। उसके बाद देवता अपने मंदिर से ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की स्वर लहरियों के बीच देव परंपरा का निर्वहन करने के लिए विशेष स्थल पर पहुंचे। यहां देव विधि से देव परंपरा निभाई गई। देवता के गूर ने देव नृत्य करते हुए बर्फ का गोला फेंका। बर्फ के गोले का भी अपना महत्व है।
मान्यता है कि देव खेल के दौरान जिस दिशा बर्फ का गोला फेंका जाता है, उस दिशा में ओलावृष्टि से फसल को अधिक नुकसान होने की संभावना रहती है। इस बार दक्षिण दिशा में गोला गिरा है। देवता के कारदार लाल चंद ठाकुर ने कहा कि इस बार फागली में पिछले साल की अपेक्षा अधिक लोगों ने मंदिर में शीश नवाया। कहा कि माहुंटी नाग अपने हारियानों और श्रद्धालुओं की मुसीबत का हल करते हैं। सूखे में सच्चे मन से प्रार्थना करने पर बारिश भी होती है। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
तीर पकड़ने के लिए रही कशमकश
देवता के पुजारी की ओर से चारों दिशा में फेंके तीर को पकड़ने के लिए सैकड़ों लाेगों के बीच काफी कशमकश रही। जीत राम ने पहला और दूसरा तीर संजय ने पकड़ा। मान्यता है कि तीर पकड़ने वालों की मनोकामना देवता पूर्ण करते हैं। इसलिए इन देव तीरों को पकड़ने के लिए खासी जद्दोजहद होती है।