बागवानी विशेषज्ञों ने लंबे ड्राई स्पेल को बागवानी के लिए खतरे की घंटी बताया
बारिश-बर्फबारी न होने से नमी की कमी से दबाव में सेब, गुठलीदार फलों के पौधे
विशेषज्ञ बोले- जहां पर संभव हो, अपने सेब के बगीचों में सिंचाई करें बागवान
बलदेव राज
कुल्लू। नवंबर से लगातार बने सूखे जैसे हालात बागवानी के लिए खतरे की घंटी बनते जा रहे हैं। बारिश और बर्फबारी के अभाव में सेब सहित गुठलीदार फलों के पौधे नमी की कमी से दबाव में हैं।
विशेषज्ञों ने चेताया है कि ड्राई स्पेल लंबा खिंचने पर स्टोन फ्रूट में समय से पहले फूल आ सकते हैं। इससे आगे चलकर उत्पादन प्रभावित होने का खतरा है। जनवरी का पहले सप्ताह में भी ड्राई स्पेल समाप्त नहीं हुआ है। सेब बेल्ट में बर्फबारी तो दूर, अभी बारिश भी नहीं हुई है। ऐसे में 27000 हेक्टेयर में होने वाली सेब की पैदावार सहित नाशपाती, प्लम, जापानी फल के लिए बागवान चिंतित हैं।
मौसम की इस स्थिति को डॉ. यशवंत सिंह परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के बागवानी विशेषज्ञों ने भी बेहद चिंताजनक बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार सूखे जैसे हालात के चलते पौधों में नमी कम हो रही है। लगातार नमी कम होने से पौधों पर भी दबाव पड़ रहा है। इसके लिए जरूरी है कि बारिश हो। बागवान जहां पर संभव हो, अपने सेब के बगीचों में सिंचाई करें। इसका फायदा रहेगा। ड्राई स्पेल लंबा खिंचता है तो इसका असर स्टोन फ्रूट पर पड़ेगा। स्टोन फ्रूट (गुठलीदार फल) आड़ू और प्लम में अर्ली फ्लावरिंग की संभावना है। गौर रहे कि इन दिनों सेब सहित अन्य फलदार पौधे सुप्त अवस्था में हैं। सबसे पहले आड़ू और प्लम के पौधों में फूल खिलते हैं।
कम बारिश और बर्फबारी से चिलिंग ऑवर्स भी प्रभावित होने के आसार हैं। हालांकि अभी बर्फबारी होने की सूरत में कुछ रिकवरी होगी लेकिन अगर जनवरी का महीना भी इसी तरह से निकला तो चिलिंग ऑवर्स भी पूरा नहीं होने का खतरा है।
सूखे जैसे हालात का बागवानी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। नमी कम होने से पौधे दबाव में हैं। बारिश-बर्फबारी कम होने से गुठलीदार फलों में जल्द फूल खिलने की संभावना है। बागवान जहां संभव हो, अपने बगीचों में सिंचाई करें। - डॉ. भूपेंद्र सिंह ठाकुर, सहनिदेशक, क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा
नर्सरियों में सूखे जैसे हालात से ब्रिकी धीमी
कुल्लू की 200 से अधिक नर्सरियों में सेब, जापानी फल और प्लम के लाखों पौधे खड़े हैं। नर्सरियों का 70 फीसदी स्टॉक अभी खड़ा है। सूखे जैसे हालात के बीच पौधों की बिक्री धीमी है। बागवानों को नई पौध लगाने के लिए बारिश का इंतजार हैं। मंडी, शिमला, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वाेतर राज्यों में पौधों की खेप जाती है।