पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से जिले के बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें
बागवान बोले- चिलिंग ऑवर्स पूरे न होने का सता रहा डर, नहीं लगा पा रहे सेब के नए पौधे
कहा- तीन साल से आ रही उत्पादन में गिरावट, फरवरी-मार्च में बर्फ नहीं गिरी तो होगा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। सूखे जैसे हालात ने सेब बगीचों में नमी सोख ली है। इससे खाद घुलने में समस्या आ रही है। बागवानी संबंधी अन्य कार्यों करने में भी दिक्कत आ रही है। जमीन में आधा फीट नीचे नमी नहीं है।
सूखे जैसे हालात में सेब के नए पौधे लगाना मुश्किल हो रहा है। जिले के बागवानों का कहना है कि सेब की अच्छी फसल के लिए बारिश और बर्फबारी की जरूरत है। इस साल न तो पर्याप्त बारिश हुई है और न ही बर्फबारी। इससे सेब की फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से बर्फबारी न होना परेशानी का सबब बन रहा है। बागवानों ने कहा कि समय पर बर्फबारी और बारिश न होने से पिछले तीन साल से सेब के उत्पादन में गिरावट आ रही है। जरूरत के मुताबिक बारिश और बर्फबारी नहीं हो रही है।
जिले में अधिकतर सेब उत्पादित इलाकों में बर्फबारी नहीं हुई है। इसका असर फसल पर पड़ने की संभावना बढ़ गई है। बागवान प्रताप पठानिया, महेश, ज्ञान ठाकुर, देवराज नेगी, चमन और कैलाश ठाकुर ने कहा कि दिन का तापमान भी सामान्य से अधिक है। बारिश और बर्फबारी नहीं होने से सूखे जैसे हालत बन गए हैं। ऐसे में चिलिंग ऑवर्स कैसे पूरे होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी और मार्च में बर्फबारी नहीं होती है तो निश्चित ही चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं होंगे, जिससे सेब फसल पर नकारात्मक असर होगा।
गुठलीदार फलों के लिए तो चिलिंग ऑवर्स सेब की तुलना में कम चाहिए। सेब के लिए 700 से 1400 घंटे चिलिंग ऑवर्स की जरूरत रहती है। फरवरी और मार्च में बर्फबारी होती है तो सेब के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर्स पूरे हो जाएंगे। चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं होने से फसल पर प्रभाव पड़ेगा।
- उत्तम पराशर, विषयवाद विशेषज्ञ, बागवानी विभाग