नगर परिषद सख्त, कोर्ट के आदेश के बाद जरूरी किया पंजीकरण करवाना
ऑनलाइन देना होगा पंजीकरण और वार्षिक शुल्क, अधिसूचना भी की जारी
गौरीशंकर
कुल्लू। नगर परिषद क्षेत्र में अब पालतू कुत्ता पालना सिर्फ शौक नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी बन गया है। कोर्ट के आदेश के बाद नगर परिषद ने सख्त कदम उठाते हुए कुत्तों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है।
इसके तहत कुत्ता पालने वालों को तय शुल्क भी अदा करना होगा। कुत्ता पालने वालों के लिए अधिसूचना जारी कर पंजीकरण करवाने को लेकर निर्देश दिए गए हैं। आदेशों के मुताबिक कुत्ते का पंजीकरण करवाना जरूरी है। पंजीकरण शुल्क के रूप से एक हजार रुपये और वार्षिक शुल्क के रूप में दो हजार रुपये अदा करने होंगे। पंजीकरण और वार्षिक शुल्क देने का कार्य ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगा।
शहरी विकास विभाग के नागरिक सेवा पोर्टल पर जाकर कुत्ते के मालिक खुद ही पंजीकरण से संबंधित प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। कोई यह प्रक्रिया पूरी नहीं करेगा तो उसके खिलाफ नगर परिषद कार्रवाई करेगी। उसे न्यायालय के चक्कर काटने पड़ सकते हैं। पहले कुत्ता पालने वाले लोग किसी तरह का पंजीकरण नहीं करवा रहे थे। नियमों को ताक पर रखकर कुत्ते पाल रहे थे। अब कोर्ट के आदेश के बाद अब नगर परिषद ने भी सख्त रुख अपना लिया है।
यह होगा फायदा
पंजीकरण करवाने के बाद कोई भी व्यक्ति पालतू कुत्ते को गलियों में नहीं छोड़ पाएगा। इससे गलियों में लावारिस कुत्तों की संख्या कम होगी और लोगों की जिम्मेदारी भी तय होगी। नगर परिषद ने अधिसूचना जारी कर कुत्तों का पंजीकरण करवाने की अपील की है। नगर परिषद के अधिकारियों की मानें तो अब तक नगर परिषद क्षेत्र में सिर्फ 20 लोगों ने ही पालतू कुत्तों का पंजीकरण करवाया है।
कोर्ट के आदेश पर नगर परिषद ने लोगों से अपील की है कि वे अपने पालतू कुत्तों का पंजीकरण करवाएं। इसके लिए सरकार ने दरें निर्धारित की हैं। कुत्ते का पंजीकरण एक हजार रुपये में होगा। वार्षिक शुल्क दो हजार रुपये तय किया है। यह कुत्ता पालने वालों के लिए जरूरी कर दिया गया है। - बीआर नेगी, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद कुल्लू
पहले 50 रुपये लगता था शुल्क
नगर परिषद के अधिकारियों की मानें तो पहले यह शुल्क 50 रुपये सालाना लिया जाता था। अब सरकार की नई अधिसूचना के मुताबिक प्रदेश भर के शहरी क्षेत्रों के लिए पंजीकरण शुल्क एक हजार रुपये और वार्षिक शुल्क 2000 रुपये निर्धारित किया गया है। धीरे-धीरे गलियों में घूमने वाले कुत्तों की पहचान के लिए भी योजना बनाई जा रही है।