शुक्रवार, समय दोपहर 1.00 बजे। 108 आपातकालीन एंबुलेंस में क्षेत्रीय
अस्पताल की 185 नंबर इमरजेंसी में मरीज को लाया जाता है। यहां डॉक्टर साहब
की कुर्सी खाली पड़ी है। मरीज के तीमारदार, 108 एंबुलेंस के कर्मचारी और
अस्पताल में तैनात प्राइवेट कंपनी के सुरक्षा कर्मी डॉक्टर साहब को ढूंढते
हैं। घायल मरीज करीब बीस मिनट से ओपीडी के बाहर कराह रहा है, लेकिन डॉक्टर
का कोई अता-पता नहीं है। इमरजेंसी में डॉक्टर की गैरमौजूदगी में करीब 20
मिनट बाद किसी दूसरी ओपीडी में मरीज को दिखाया जाता है। लिहाजा, इमरजेंसी
में आने वाले मरीजों के लिए इमरजेंसी ओपीडी का कोई महत्व नहीं है। इससे
लगता है कि मरीजों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ हो रहा है।
गौरतलब है
कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में मरीजों को लगातार परेशानियों का सामना
करना पड़ रहा है। उधर, अस्पताल प्रशासन को लोगों की सेहत से कोई सरोकार
नहीं है। कुछ दिन पहले जब अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद तोड़फोड़ हुई
थी तो उस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा था कि इमरजेंसी में दो
डॉक्टर तैनात किए जाएंगे। लेकिन, अभी तक इस पर अमल नहीं किया गया है।
अस्पताल प्रशासन दावा करता रहता है कि अस्पताल में डॉक्टरों की कमी नहीं
है, लेकिन इमरजेंसी में दो डॉक्टर अब तक तैनात क्यों नहीं किए जा रहे हैं,
यह एक बड़ा सवाल है? गत दिनों डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज काफी परेशान रहे।
लिहाजा, अब इमरजेंसी ओपीडी में डॉक्टर न मिलना मरीजों की सेहत के साथ सीधा
खिलवाड़ है।
इधर, डॉक्टर की अनुपस्थिति को लेकर सीएमओ कुल्लू डॉ.
वाईडी शर्मा ने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ओपीडी में 24 घंटे
डॉक्टर तैनात किए गए हैं। एक-एक डॉक्टर सुबह-शाम और रात-दिन सेवाएं दे रहे
हैं।