सेब बगीचों में बागवानों ने आजकल प्रूनिंग का कार्य शुरू कर दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों ने बागवानों को पतझड़ के बाद ही पौधों की काटछांट करने की सलाह दी है। घाटी में बागवान आजकल सेब के अलावा प्लम, नाशपाती और बादाम के पौधों की काटछांट कर रहे हैं।
बागवानों ने बर्फ से सेब बगीचों को पहुंचने वाले खतरे को देखते हुए प्रूनिंग का कार्य तेज कर दिया है। खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बागवानों ने काटछांट करने वाले माहिर लोगों को बगीचों में काम पर लगा दिया है। हालांकि, गुठलीदार फलों की काटछांट का काम कई बागवानों ने निपटा भी दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेब के सभी पौधों में काटछांट जरूरी है। इससे पौधों की बढ़ोतरी और फल उत्पादन को सुधारा जा सकता है। उद्यान विभाग के विकास अधिकारी उत्तम पराशर का कहना है कि जब तक पौधे की बढ़त पर्याप्त न हो, उस पर कुछ ही फूल और फल लगेंगे। लिहाजा, काटछांट बागवानी का अहम हिस्सा है और यह हर साल होनी चाहिए।
घाटी के प्रगतिशील बागवान रमेश, अमित, सुशील, चमन, राजकुमार, राजेंद्र, लालचंद, मेहर चंद, चंदेराम, बुद्धि प्रकाश आदि ने कहा कि इन दिनों बागवान बगीचों में काटछांट करने में व्यस्त हैं। वहीं, पौधों पर चौबाटिया पेस्ट भी लगाया जा रहा है। प्रूनिंग से फलों की गुणवत्ता भी उम्दा किस्म की होती है। इसलिए वे हर साल अपने तमाम पौधों की काटछांट करते हैं। बागवानी अनुसंधान केंद्र बजौरा के सह निदेशक डॉ. जयंत कुमार कहते हैं कि जहां पर पूर्णता पतझड़ हो चुकी है, उन बगीचों में प्रूनिंग का कार्य करना उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर के बाद सेब की प्रूनिंग का उचित समय है। बागवानों को काटछांट के बारे में विशेषज्ञों से भी सलाह जरूर लेनी चाहिए।