देवभूमि कुल्लू की नदियों में बीस भादो पर्व पर आस्था का जनसैलाब उमड़ा। इस दौरान औषधीय गुणों से युक्त पानी से श्रद्धालुओं ने स्नान किया। यही नहीं, इस बार जन्माष्टमी और बीस भादो का पर्व साथ होने पर घाटी के कई देवी-देवताओं ने भी शाही स्नान किया।
खीरगंगा और मणिकर्ण में गर्म पानी के चश्मों में श्रद्धालुओं ने स्नान किया तो वहीं भुंतर के जीया स्थित पार्वती-ब्यास पवित्र संगम स्थल में सुबह से ही भक्तों की भीड़ स्नान के लिए जुटनी शुरू हो गई थी। देर शाम तक लोग ब्यास और पार्वती नदी के पवित्र संगम स्थल पर स्नान करते रहे। शनिवार सुबह साढ़े सात बजे लगघाटी के भाल्टी नारायण देवता ने भी अपने हारियानों और भक्तों सहित पवित्र शाही स्नान किया। इसके अलावा मनाली के तपोस्थल वशिष्ठ, ब्यासकुंड, गड़सा घाटी के झूणी, निहारगण में भी लोगों ने नदी के किनारे पवित्र स्नान किया। इस दौरान पूजा-अर्चना भी की गई। इस बार बीस भादो और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एक साथ होने से श्रद्धालु काफी खुश दिखे और अधिकतर श्रद्धालुओं ने व्रत भी रखा। उधर, धार्मिक नगरी मणिकर्ण में पवित्र स्नान के लिए शनिवार सुबह पांच बजे से ही हजारों भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी और शाम तक भक्त मणिकर्ण में गर्म पानी के चश्मों में स्नान करते रहे। मणिकर्ण में पवित्र स्नान के लिए श्रीराम मंदिर कमेटी ने पूरी तैयारी कर रखी थी और भक्तों के खाने-पीने सहित ठहरने का भी इंतजाम किया गया था। श्रीराम मंदिर समिति के अध्यक्ष जनकराज शर्मा ने बताया कि हर वर्ष बीस भादो पर पवित्र स्नान के लिए हजारों श्रद्धालु मणिकर्ण आते हैं। इस बार भी दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मणिकर्ण में बीस भादो पर्व पर पवित्र स्नान किया। ऐसा माना जाता है कि भादो माह में पहाड़ों पर उगने वाली जड़ी-बूटियां पूरी तरह से तैयार हो जाती हैं और वे अपने औषधीय गुणों को पानी में छोड़ देती हैं। इस दिन स्नान करने से पवित्रता ही नहीं, कई चरम रोगों का खात्मा भी होता है।