भारत-बांग्लादेश सीमा पर 1991 में तस्करों ने चलाई थीं बीएसफ जवान पर गोलियां
34 साल बाद पैतृक गांव बाशिंग में किया देवी चंद की प्रतिमा का अनावरण
परिजन सम्मानित, विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी बांधा समां
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान देवी चंद ने साल 1991 में भारत-बांग्लादेश की सीमा पर पशु तस्करी को रोकने में अहम योगदान दिया था।
तस्करों की ओर से की गई गोलीबारी में उन्होंने देश और पशु प्रेम में अपनी जान गंवाई थी। 34 साल बाद उनके पैतृक गांव बाशिंग में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक मदन लाल कौशल और बीएसएफ की 510 बटालियन की टीम विशेष रूप से उपस्थित रही।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों और मूर्ति अनावरण समिति के सदस्यों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। कार्यक्रम में अधिवक्ता ताराचंद कौशिक के अलावा शहीद देवी चंद के परिजनों को सम्मानित किया गया।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि शहीद देवी चंद का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। युवाओं को नशे, विशेषकर चिट्टा जैसे खतरनाक ड्रग्स से दूर रहना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अनुशासन, नियमों के पालन और कानून व्यवस्था में सहयोग की अपील की। अभिभावकों से कहा कि बिना लाइसेंस नाबालिग बच्चों को वाहन न सौंपें। उन्होंने बच्चों को मोबाइल और नशे से दूर रहकर खेल, संस्कृति और सकारात्मक गतिविधियों में ऊर्जा लगाने को कहा। इस दौरान बाशिंग पंचायत की प्रधान डोली ठाकुर, उपप्रधान विजय कुमार, नल्हाच पंचायत के उपप्रधान चमन ठाकुर, बनोगी पंचायत के उपप्रधान रामनाथ, समाजसेवी विजय सेन, राजेश शास्त्री, नरोत्तम जांगीर, बाबा कुमार, दास प्रधान, प्रधानाचार्य राजेश ठाकुर आदि उपस्थित रहे।