बंजार (कुल्लू)। नवसंवत पर मंगलवार को देव श्रीबड़ा छमाहूं के सम्मान में कोटला देव परंपरा का निर्वहन किया गया। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज करवाई। सृष्टि के रचनाकार देव श्रीबड़ा छमाहूं नव संवत पर स्वर्गलोक से धरती लोक पर उतरे। स्वर्गलोक से लौटते ही देवता सबसे पहले अपनी 44,000 रानियों से मिलने गए।
देवता की भव्य शोभायात्रा कोटला गांव से चवाली माता मंदिर तक पहुंची। यहां अपनी रानियों से देवता बड़ा छमाहूं ने भव्य मिलन किया और देव कार्यवाही हुई। मान्यता है कि जब देवता को वापस लाने का प्रयास किया जाता है तो योगनियां देवता को अपने आगोश में कैद कर लेती हैं। सैकड़ों लोगों के खींचने पर भी देवरथ टस से मस नहीं होता है
। इसके बाद देवता को रस्सा लगाकर सैकड़ों लोगों की ओर से खींचा गया, फिर भी देवता एक इंच भी नहीं हिले। उसके बाद रस्से में परंपरा के अनुसार जूठ लगाई गई, तभी योगनियों की कैद से देवता मुक्त हुए और देवता बड़ा छमाहूं की शोभायात्रा कोटला गांव तक लाई गई।
इसके बाद बड़ा छमाहूं का उनके छोटे भाई धामणी छमाहूं के साथ देवता का भव्य मिलन हुआ। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में देवता को धूप चढ़ाया। यह दृश्य भावविभोर करने वाला था।
मान्यता है कि आज के दिन सृष्टि उत्पन्न हुई है। गौर रहे कि देव श्रीबड़ा छमाहूं सृष्टि के रचयिता हैं। पुजारी धनेश गौतम ने कहा कि उत्सव के चलते गांव में खुशी का माहौल देखने को मिला।