कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का नगाड़ा बजने वाला है। दशहरा की मुख्य पहचान देवी-देवता हैं। 20 अक्तूबर से देवी-देवताओं की दशहरा के लिए रवानगी शुरू हो जाएगी।
देवता खुडीजल का पहला पड़ाव आरंभ हो जाएगा। 24 से 30 अक्तूबर तक चलने वाले देवी-देवताओं के महाकुंभ में जिले के सैकड़ों देवी-देवताओं के रथ सजकर तैयार हो गए हैं।
दशहरा में भाग लेने के लिए बाह्य सराज आनी-निरमंड के देवता 20 अक्तूबर को रवाना हो जाएंगे। अधिष्ठाता देव खुडीजल 20 अक्तूबर सुबह 11 बजे के आसपास अपने देवालय देहुरी से निकलेंगे। इस बार देवता मंडी जिले के गाड़ागुशैणी होकर आएंगे। उनका पहला पड़ाव खौली के नेहरा गांव में होगा।
कोट पझारी और देवता टकरासी 21 अक्तूबर को रवाना होंगे, उनका रात्रि ठहराव बंजार में होगा। ब्यास ऋषि, देवता चोतरू नाग, बिशलू नाग, देवता चंभू, सप्तऋषि सहित अन्य देवी-देवता भी 21 अक्तूबर को रवाना होंगे। ये सभी देवता अपने देवालय से कुल्लू तक करीब 150 से 200 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर कुल्लू पहुंचेेंगे।
कारदार शेर सिंह, भागे राम राणा तथा पुजारी पूर्ण शर्मा ने कहा कि बाह्य सराज के देवता 20 अक्तूबर से दशहरा के लिए निकलना आरंभ होंगे। जिला देवी-देवता कारदार संघ के प्रधान दोत राम ठाकुर का कहना है कि दूरदराज के देवी-देवता दशहरा से चार-पांच दिन पहले ही रवाना हो जाते हैं। संवाद