देहुरी मेले के अंतिम दिन देवनृत्य करते खुडीजल व खोडू देवता।
कुल्लू। दस दिन तक मनाया गया देहुरी मेला आठ सितंबर को संपन्न हो गया। लोगों को आशीर्वाद देकर खुडीजल और खोडू देवता अपने देवालय में विराजमान हो गए हैं। बीते शुक्रवार को रघुपुरघाटी और मानगढ़ के हजारों लोगों ने देवताओं के आगे शीश नवाया। देव संस्कृति और आपसी भाईचारे के प्रतीक देहुरी मेले के अंतिम दिन देवता खुडीजल के कारकूनों ने देवता के निशान के साथ ढोल नगाड़ों की थाप और शहनाई की स्वरलहरियों के साथ नृत्य किया।
इस दौरान देवताओं ने भी नृत्य कर लोगों को अगले साल तक का आशीर्वाद दिया। मेले में आए अन्य देवता पहले ही अपने देवालय के लिए लौट गए थे। शनिवार को रावल ऋषि भी मेले से वापस अपने देवालय में विराजमान हो गए हैं। मेले के निपटने के बाद अब लोग अपने कृषि और बागवानी कार्य में जुटेंगे। अक्तूबर में कारकून दशहरा की तैयारी शुरू करेंगे। कारदार शेर सिंह, चमन लाल, शिवराज शर्मा, दलीप सिंह, पवित्र सिंह ने कहा कि मेले में मौसम ने पूरा साथ दिया।
रघुपुर घाटी के साथ मंडी जिले के मानगढ़ क्षेत्र की चार पंचायतों के लोगों ने भी मेले का खूब आनंद लिया। मेले में लोगों को देव संस्कृति के साथ आपसी भाईचारे का संदेश दिया है। मेला खत्म होने पर अब लोग सेब सीजन को निपटाने में लगे हैं। घाटी के फनौटी, बनाला, लोट, बालू, करशाला, जुहड़, दपांदा रोहाचला और बलेहड़ आदि गांव में सेब तैयार हो गया है। संवाद