कल्लू के मकराहड़ में बैसाख संक्रांति के मौके पर शाही स्नान करते देवता मार्कंडेय ऋषि हरियानो के
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कुल्लू। जिले की गड़सा घाटी के मकराहड़ में बैसाख संक्रांति के अवसर पर देवता मार्कंडेय ऋषि का पारंपरिक शाही स्नान हुआ। ब्यास और गोमती नदियों के संगम स्थल पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आस्था की डुबकी लगाई। मंगलवार सुबह देवता अपने देवालय से पूरे लाव-लश्कर के साथ बाहर निकले और श्रद्धालुओं को दर्शन देकर आशीर्वाद दिया। ढोल-नगाड़ों और नरसिंगों की गूंज के बीच देवता का रथ शाही स्नान के लिए रवाना हुआ। करीब 11:45 बजे विधि-विधान के साथ शाही स्नान की परंपरा निभाई गई।
शाही स्नान के बाद देवता ने पूजा-अर्चना की और फिर अपने मूल स्थान पर विराजमान हुए। इस दौरान देवता की धरती माता के दूध पीने की प्राचीन रस्म भी निभाई गई, जिसमें देवता का रथ पूरी तरह से जमीन से लग जाता है। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचे।
देवता के कारदार जीवन प्रकाश शर्मा ने बताया कि यह परंपरा सदियों पुरानी है। बैसाख संक्रांति पर देवता मकराहड़ में शाही स्नान के लिए आते हैं। श्रद्धालु भी इस अवसर पर पवित्र स्नान कर पुण्य कमाते हैं। इस दौरान पुजारी मोहित शर्मा, मंदिर कमेटी के प्रधान पृथ्वी सिंह पाल, भंडारी राजेंद्र पाल, सलाहकार बालमुकुंद नेगी, सचिव इंद्र सिंह ठाकुर आदि मौजूद रहे। संवाद