लाहौल-स्पीति गाहर घाटी के देवता तंगजर और ड्रावला क्षेत्र की परिक्रमा पर निकले हैं। -संवाद
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उदयपुर (लाहौल- स्पीति)। लाहौल की गाहर घाटी के देवता तंगजर और ड्रावला इन दिनों परिक्रमा पर हैं।
चार नवंबर से गाहर घाटी में अपने क्षेत्र की परिक्रमा के दौरान प्युकर गांव के देवता तंगजर और प्यासो गांव के देवता ड्रावला यूरनाथ और गुस्क्यार के बाद वीरवार को रात्रि ठहराव के लिए बिलिंग गांव पहुंचे।
बताया जा रहा है कि दोनों देवता एक साल अपने मंदिर में ही विराजमान होने के बाद क्षेत्र की परिक्रमा पर निकलते हैं। बताया जाता है कि तंगजर देवता का गाहर घाटी के कई हिस्सों में अपनी जमीन है। इस दौरान देवता के लिए जगह-जगह जगराते का भी आयोजन किया जा रहा है।
गाहर घाटी के देवता तंगजर और ड्रावला एक माह तक गाहर घाटी की परिक्रमा पर हैं। इस सप्ताह में दोनों देवता यूरनाथ गांव से बिछडे़ंगे। इस दौरान देवलू भावुक हो जाते हैं। तंगजर देवता के पुजारी ज्ञलछन और ड्रावला के दोरजे ने बताया कि तंगजर देवता का अपना स्थान स्तींगरी से लेकर बिलिंग और ड्रावला का गुस्क्यार और परस्पराग में है।
उन्होंने कहा कि घाटी में आज भी देवताओं के पुरातन परंपराओं का पालन किया जाता है। दूसरी ओर घाटी के आराध्य देवता राजा घेपन और देवी भोटी अगले वर्ष लाहौल की परिक्रमा पर निकलेंगे। राजा घेपन और देवी भोटी दो वर्ष बाद तीसरे साल में लाहौल की परिक्रमा पर निकलते हैं। इसका घाटी के लोगों को बेसब्री से इंतजार है।