जिला में आपदा से निपटने के सभी दावों की पोल खुल
गई है। यहां आपदा प्रबंधन से निपटने वाले जवान या तो अप्रशिक्षित हैं या
फिर उनके पास आधुनिक उपकरणों की कमी है। इसका ताजा उदाहरण बंजार के देहुरी
में देखने को मिला। यहां दो दिन से जुटे अग्निशमन विभाग के कर्मचारी और
पुलिस के जवान तीर्थन नदी में फंसे शव को निकालने में असफल रहे। हालांकि
देर शाम एनडीअारएफ की टीम ने शव को कड़ी मशक्कत के बाद निकाल दिया।
अब
सवाल यह उठता है कि ऐसे कैसे आपदाओं से निपटा जाएगा? हैरानी की बात यह है
कि दमकल विभाग स्कूलों तथा अन्य कई जगहों पर आपदाओं से बचने के लिए लोगों
को जागरूक करने के मकसद से कार्यशालाएं आयोजित करता है, लेकिन लगता है कि
इस विभाग में तैनात जवान खुद अप्रशिक्षित हैं या फिर इन्हें और प्रशिक्षण
की जरूरत है। इन विभागों के पास आपदा के समय इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक
उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। लोगों ने मंगलवार को नदी के बीच एक शव को फंसे
हुए देखा था। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी। पुलिस प्रशासन के
जवान मौके पर पहुंचे लेकिन वे पानी का बहाव देखकर कुछ नहीं कर पाए। इसके
बाद पुलिस ने अग्निशमन विभाग को सूचित किया। अग्निशमन विभाग के कर्मचारी भी
मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य में जुट गए लेकिन इन्होंने भी नदी में फंसे शव
को बाहर निकालने से हाथ खड़े कर दिए। बुधवार को दमकल और अग्निशमन विभाग के
जवान फिर शव निकालने मौके पर पहुंचे। शव उसी स्थान पर फंसा हुआ था। इस
दौरान दोनों विभाग के जवानों ने रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन फंसे शव तक
नहीं पहुंच पाए। उसके बाद दोनों विभाग के कर्मचारी दोपहर बाद खाली हाथ वापस
बंजार लौट गए। दमकल विभाग लारजी के प्रभारी भीम सिंह नेगी का कहना है कि
देर शाम एनडीआरएफ की टीम ने शव को बाहर निकाला है। शव की पहचान नहीं हो
पाई है। इसे बंजार के शवगृह में रखा गया है।