मणिकर्ण घाटी के जलूग्रां में चोंग की पार्वती की पूजा-अर्चना करती महिलाएं
कुल्लू। देवभूमि कुल्लू की पार्वती घाटी अपनी समृद्ध देव संस्कृति और अनूठी परंपराओं के लिए जानी जाती है। यहां देवी-देवताओं में गहरी आस्था के बीच माता पार्वती (चौंगासना) की पूजा का विशेष महत्व है, जिसे क्षेत्र की बेटियां सामूहिक रूप से बड़े श्रद्धा भाव से निभाती हैं। इस बार भी यह परंपरा जल्लूग्रां में बेटियों ने सामूहिक रूप से निभाई। पार्वती घाटी में वर्ष में लगभग चार बार विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में धूप देना कहा जाता है। इस अवसर पर क्षेत्र की बेटियां और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर माता पार्वती के मंदिरों में एकत्रित होती हैं। वे माता को तिलक लगाकर धूप अर्पित करती हैं और अक्षत, पुष्प, चूड़ियां और चुनरियां भेंट स्वरूप चढ़ाती हैं। स्थानीय निवासी सेना पाल का कहना है कि इस परंपरा की खास बात यह है कि इन आयोजनों के दौरान क्षेत्र की सभी बेटियां अपने मायके लौटती हैं और सामूहिक रूप से पूजा में भाग लेती हैं, जिससे पारिवारिक और सामाजिक संबंध भी मजबूत होते हैं। यह विशेष आयोजन चौंग गांव स्थित माता पार्वती (चौंगासना) मंदिर में होता है, जबकि हर तीसरे वर्ष बिरशू मेले के दौरान जल्लूग्रां में भी इसका भव्य आयोजन किया जाता है।
स्थानीय मान्यता के मुताबिक माता पार्वती की इस पूजा से क्षेत्र में सुख-समृद्धि आती है और फसल भी अच्छी होती है। साथ ही बेटियों पर माता की विशेष कृपा और आशीर्वाद बना रहता है। श्रद्धालु मानते हैं कि माता का आशीर्वाद पूरे क्षेत्र पर बना रहता है, जिससे यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित और सशक्त बनी हुई है।