बंजार में देवी-देवता के कारदार के साथ बंजार एसडीएम कार्यालय में बैठक करते हुए।
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बंजार (कुल्लू)। कुल्लू में 25 अक्तूबर से शुरू होने वाले अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में इस बार बंजार घाटी के देवी-देवता शामिल नहीं हो पाएंगे। बंजार और सैंज घाटी के 80 से अधिक देवी-देवता हर साल दशहरे की शोभा बढ़ाते हैं। कोरोना के चलते इस बार दशहरा सूक्ष्म रूप से मनाया जा रहा है। ऐसे में सिर्फ सात देवी-देवताओं के ही शामिल होने पर सहमति बनी हुई है। बंजार घाटी के देवता इस बार कोरोना के चलते दशहरे से दूर ही रह जाएंगे।
गौर रहे कि देवता शृंगा ऋषि, देवता बालू नाग, देवता पझारी लक्ष्मी नारायण बाहू, देवता गढ़पति शेषनाग जिभी, माता गाड़ादुर्गा तीर्थन, बुंगडू महादेव, देवता मार्कंडेय ऋषि बलागाड़ सहित दर्जनों देवता ढालपुर के मैदान में सात दिनों तक डेरा लगाते हैं। देवताओं के पास सैकड़ों श्रद्धालु भी शीश नवाते हैं। लेकिन इस बार सूक्ष्म रूप से मनाए जा रहे दशहरे में बंजार का कोई देवता ढालपुर मैदान के लिए रवाना नहीं हो सकेगा। इसको लेकर शुक्रवार को बंजार में दशहरा पर्व को लेकर उपमंडल स्तरीय बैठक हुई। एसडीएम बंजार हेम चंद वर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते दशहरा पर्व सूक्ष्म तरीके से मनाया जा रहा है। बंजार के सभी कारदारों तथा देवी-देवताओं से जुड़े हुए लोगों से अपील की है कि वे दशहरे को लेकर किसी प्रकार का कदम न उठाएं। कोई भी देवी-देवता दशहरा पर्व के लिए ढालपुर की ओर कूच न करें। कोरोना महामारी के चलते जो प्रदेश सरकार ने एडवाइजरी जारी की है, उसके अनुसार सभी को कानून का पालन करना पड़ेगा। अगर कोई व्यक्ति और हारियान गलत कदम उठाएगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों कारदारों ने प्रशासन व सरकार से आग्रह किया था कि देवी-देवताओं के पर्व से रोक हटनी चाहिए। इस पर प्रशासन फैसला लेगा। विशेषकर दशहरा पर्व को सूक्ष्म तरीके से मनाया जाएगा। देवी-देवता को लेकर कोई भी हारियान दशहरा पर्व के लिए न जाएं।