तीन गांवों का संपर्क टूटने की आशंका
ग्रामीणों ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग
ग्लेशियर पिघलने से हो सकता है खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के जोबरंग, रापे और राशेल गांवों को जोड़ने वाला जोबरंग पुल इन दिनों गंभीर खतरे की जद में है। बढ़ते जलस्तर और हालिया बाढ़ के प्रभाव से चिंतित ग्रामीणों ने उपायुक्त किरण भड़ाना को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया है। वहीं, ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई सालों से जाहलमा नाले में आ रही बाढ़ के कारण चंद्रभागा नदी का बहाव प्रभावित हुआ है। इससे जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में पानी पुल से मात्र सात से आठ फीट नीचे रह गया है। ऐसे में अप्रैल में बर्फ पिघलने के साथ जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे पुल के जलमग्न होने का खतरा पैदा हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जोबरंग पुल इन तीनों गांवों को घाटी के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र साधन है। यदि पुल डूब जाता है तो तीनों गांवों का देश दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट सकता है। ग्रामीण बलदेव सिंह ने बताया कि यह पुल उनके लिए जीवनरेखा है और इसके बिना वे पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएंगे।
पुल के जलमग्न होने की स्थिति में आवाजाही पूरी तरह बाधित हो जाएगी। किसानों की फसलें और सब्जियां मंडियों तक नहीं पहुंच पाएगी। जिससे आर्थिक नुकसान होगा। वहीं, आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाएगा और बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने उपायुक्त किरण भड़ाना से जाहलमा नाले के मुहाने पर जमा मलबे को हटाने, नदी के बहाव को नियंत्रित करने और पुल के आसपास जमा रेत-बजरी को साफ करवाने की मांग की है। ग्रामीणों ने पिछले एक वर्ष से लंबित राशेल-लिंगर संपर्क सड़क के कार्य को भी शीघ्र पूरा करने की मांग उठाई है। उपायुक्त ने लोगों की मांग को सुनकर जल्द समाधान का आश्वासन दिया।