बंजार के शलेरा में 18 लाख से बनाए गोसदन में एक दिन भी नहीं रखे मवेशी
खेतों में फसलों को उजाड़ रहे मवेशी, सड़कों पर हादसों का भी बन रहे कारण
प्रीतम शर्मा
गुशैणी (कुल्लू)। उपमंडल में बेसहारा मवेशियों की समस्या बढ़ती जा रही है। बेसहारा मवेशी खेतों में जाकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सड़क और खेतों में भटक रहे मवेशियों को आश्रय देने के लिए सात साल पहले चनौन पंचायत के शलेरा में 18 लाख रुपये से गोसदन बनाया है। यह गोसदन खाली पड़ा है। इसमें 40 मवेशियों के रखने की क्षमता है। आलम यह है कि इस गोसदन में एक भी मवेशी नहीं है। बेसहारा मवेशी सड़क और गलियों में घूम रहे हैं।
लोगों की मानें तो इस गोसदन को ऐसी जगह बनाया है जहां पानी और अन्य प्रबंध करना मुश्किल है। इसलिए न तो गोसदन संचालक रुचि ले रहे हैं और न ही पशुओं को रखने की पहल की गई है। जब से यह गोसदन बना है, तब से इसमें पशु नहीं रखे गए।
लोगों का कहना है कि बेसहारा मवेशी उनके खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रशासन बेसहारा पशुओं को गोसदन में भेजने की बात करता है लेकिन बंजार में बनाया गोसदन खाली पड़ा है। मवेशी सड़कों और लोगों के खेतों में हैं। गौरतलब है कि प्रशासन ने उपमंडल में बेसहारा घूमने वाले मवेशियों के लिए वर्ष 2018 में शलेरा में 18 लाख रुपये की लागत से गोसदन का निर्माण किया है। उसके बाद भी बेसहारा मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रशासन को बेसहारा मवेशियों के लिए ठिकाना ढूंढना चाहिए ताकि इन सर्दियों के दिनों में उन्हें ठंड से न ठिठुरना न पड़े। साथ ही किसानों और बागवानों की फसलें भी इनसे बचाई जा सकें। - प्रीतम भारती, बाडीरोपा
प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से प्रयास करे। सड़कों और खेतों में भटक रहे बेसहारा मवेशियों को गोसदन में भेजा जाना चाहिए। इससे किसानों की फसलों का बचाव होगा तो मवेशी भी ठंड से बच जाएंगे। - सोनू शर्मा, बंदल
बेसहारा मवेशियों की समस्या को लेकर स्थानीय नगर निकायों और पंचायतों के साथ मिलकर प्रयास किया जा रहा है ताकि लोगों को भी इस समस्या से छुटकारा मिल सके और बेसहारा पशुओं को आश्रय मिल सके। - रवि ठाकुर, उप निदेशक, पशुपालन विभाग