उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। क्षेत्रीय अस्पताल केलांग के डॉक्टर मनोज ने कोरोना पर एक घंटे फेसबुक लाइव कर लोगों को कोरोना को लेकर जागरूक किया। सेव लाहौल-स्पीति के फेसबुक पेज पर लाइव कार्यक्रम को करीब दस हजार लोग देख चुके हैं।
डॉ. मनोज ने कहा कि कोरोना में अब रिसैंपलिंग की जरूरत नहीं है। अगर पाजीटिव व्यक्ति 10 दिन तक घर पर ही परिवार से अलग रहकर आइसोलेशन पीरियड प्रक्रिया को पूरा करता है तो इसके अतिरिक्त चार दिन तक किसी भी तरह के लक्षण सामने न आएं तो उसके बाद वायरस भी कमजोर पड़ जाता है। इस वजह से वायरस दूसरे व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति एक बार पाजिटिव हो जाता है तो उसके शरीर में एंटीबॉडी बनते हैं, जो तीन माह तक शरीर को इंफेक्शन से बचाते हैं। तीन माह के बाद एंटीबाडी खत्म हो जाती है तो फिर से शरीर में इंफेक्शन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आज लोगों में भ्रांतियां भी फैली हैं कि कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति को सीधे ही नेरचौक ले जाते हैं। सत्य यह है कि उन्हीं पॉजिटिव लोगों को नेरचौक रेफर किया जाता है जिनका आक्सीजन लेवल बहुत कम हो और वेंटीलेटर की जरूरत हो। उन्होंने कहा कि लोगों में गलत फहमी है कि आम सर्दी, बुखार में टेस्ट करने पर भी पॉजिटिव आ रहे हैं जो गलत है। डॉ. मनोज ने बताया कि सर्दी, बुखार तो कोरोना महामारी से पहले भी होता था। कोरोना से होने कोल्ड कफ वाले मरीज ही टेस्ट में पॉजिटिव आते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के साथ मतभेद और सोशल बायकाट न करें। कोविड की वजह से आज बहुत से लोग परेशान होने के साथ ही डिप्रेशन का भी शिकार हो रहे हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि सोसायटी में ऐसा माहौल बनाएं कि कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति को भी अपनापन लगे। उन्होंने फेसबुक पेज पर बुधवार रात आठ से नौ बजे तक एक घंटे के फेसबुक लाइव सेशन को 10 हजार लोग देख चुके हैं। डॉ मनोज ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को कोरोना से संबंधित लक्षण लगने लगे तो अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर अवश्य टेस्ट करवा लें।