जिला कुल्लू की सैंज-न्यूली सड़क जो एफडीआर तकनीक से बनने वाली पहली सड़क है। संवाद।
ॉसैंज (कुल्लू)। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तीसरे चरण में सड़कों का निर्माण अब पर्यावरण फ्रेंडली तकनीक से होगी। इसी के तहत जिला कुल्लू के सैंज से न्यूली के बीच सड़क बन रही है। यह एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक से बनने वाली जिला कुल्लू की पहली सड़क होगी। इससे यह सड़क सैंज क्षेत्र के लोगों के आवागमन को आसान करने के साथ घाटी के अनछुए पर्यटन स्थलों को भी पंख लगाएगी।
लोक निर्माण विभाग ने सड़क का टेंडर आवंटित कर इसका निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक बनी सड़क वनवे है और अब प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना तीन के इस सड़क को अब नौ की जगह 14 फुट तक चौड़ा किया जाएगा। खास बात है कि सड़क की टारिंग पर्यावरण फ्रेंडली होगी। इसमें किसी तरह के कैमिकल का इस्तेमाल नहीं होगा।
जिला कुल्लू की इस तरह की यह पहली सड़क होगी, जिसका काम भी तेजी से शुरू हो गया है। सड़क के विस्तारीकरण से सैंज क्षेत्र के लोगों में खुशी का माहौल है। संजीव कुमार, टेक सिंह, भाग सिंह तथा नीमत राम ने कहा कि सैंज से न्यूली तक इस किलोमीटर सड़क का नई तकनीक से विस्तार होने से स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को सफर सुहाना होगा। उन्होंने कहा कि इस सड़क से 2023 में पिन पार्वती नदी के जगह-जगह तहस-नहस हुई सड़क को भी नया रूप मिलेगा
क्या है एफडीआर तकनीक
फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक में पुरानी सड़क के पूरे क्रस्ट का दोबारा इस्तेमाल हो जाता है, स्टोन एग्रीगेट यानी गिट्टी की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें सड़क का निर्माण बहुत तेजी से होता है और मरम्मत में खर्च भी कम आता है। विशेष मशीनों से क्रस्ट व सीमेंट आदि को मिलाकर सड़क बनती है। इस तकनीक से बनी सड़कें सामान्य सड़कों की तुलना में ज्यादा मजबूत होती है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता चमन ठाकुर ने कहा कि 10 किमी लंबी सैंज-न्यूली सड़क जिला कुल्लू की पहली सड़क है। इसका निर्माण पीएमजीएसवाई तीन के तहत एफडीआर तकनीक से हो रहा है। इस पर करीब दस करोड़ की राशि खर्च हो रही है। टैंडर करवा कर एक सप्ताह पहले से इसका निर्माण कार्य शुरू हो गया है।