पुराने-नए खसरा नंबर का संबंध साबित नहीं कर सका वादी
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जमीन की रजिस्ट्री करवाने के लिए करीब 29 साल पुराने समझौते के आधार पर दायर वाद को अदालत ने खारिज कर दिया। वरिष्ठ सिविल जज कुल्लू की अदालत ने पाया कि वादी पुराने और नए खसरा नंबर का संबंध साबित नहीं कर सका। समझौते में शामिल एक सह-विक्रेता को भी मुकदमे में पक्षकार नहीं बनाया गया था।
मामले के अनुसार 18 नवंबर 1986 को दो बिस्वा जमीन का सौदा 4,500 रुपये में तय हुआ था। वादी ने 2,000 रुपये अग्रिम देने का दावा करते हुए रजिस्ट्री करवाने की मांग की थी। इसके लिए 9 सितंबर 2015 को अदालत में वाद दायर किया गया।
वीरवार को अदालत ने पाया कि जमीन के पुराने खसरा नंबर 3846 और नए खसरा नंबर 3848 के एक ही होने का दस्तावेजी प्रमाण नहीं दिया गया। साथ ही, वादी यह भी साबित नहीं कर सका कि रजिस्ट्री से इनकार कब किया गया और दावा निर्धारित समय-सीमा के भीतर था। इन आधारों पर अदालत ने वाद खारिज कर दिया।