उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की गोंधला पंचायत के अंतर्गत वामतट पर बसे यांगला गांव के बाशिंदे आज तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ सके। इसके अलावा यहां पर पुल का निर्माण भी सपना बनकर रह गया है।
गांव में 24 परिवार के लोग रहते हैं। साथ ही चार अन्य गांव के लोगों की भी जमीन यांगला में है। उनको भी यहां आने के लिए मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। सड़क व पुल न बनने से यहां के लोगों को अपने खेतों के उत्पाद व खाद्य सामग्री घोड़ों पर लाद कर घर और सड़क तक पहुंचानी पड़ती है। सड़क न होने से उनके उत्पाद की 35 से 40 फीसदी कमाई घोड़ों की ढुलाई पर खर्च हो जाती है। किसी भी राजनीतिक दल के नेता ने यांगला गांव को सड़क व पुल से जोड़ने को लेकर कोशिश नहीं की, जिसका खामियाजा यहां के लोग भुगत रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार राजनीतिक दल के नेताओं ने सड़क, पुल बनाए जाने को लेकर आश्वासन ही दिए हैं। उधर, इस संबंध में लोनिवि के सहायक अभियंता केडी कश्यप ने कहा कि यांगला पुल के लिए 4 करोड़ 25 लाख की राशि स्वीकृत हो गई है। एक नवंबर को पुल की नींव के एि खुदाई का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। सड़क निर्माण कार्य फॉरेस्ट क्लीयरेंस आने के बाद ही शुरू किया जा सकेगा।
कांग्रेस ने जारी की थी राशि
स्थानीय जिप सदस्य शशिकिरन ने कहा कि सड़क व पुल विकास की पहली प्राथमिकता है। कांग्रेस सरकार ने यांगला गांव को पुल से जोड़ने के लिए 1 करोड़ 85 लाख की राशि जारी की थी। सरकार बदली और भाजपा ने इस पर काम नहीं किया।
सड़क न होने से दिक्कत
यांगला गांव के रंजीत सिंह का कहना है कि गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क व पुल की है। यांगला पुल का निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाए। उनकी समस्या को कोई नहीं सुन रहा है। सड़क नहीं होने से लोगों को आवाजाही में दिक्कत होती है।
पुल की नींव रखने की मांग
पूर्व बीडीसी अध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि यांगला के लोगों के लिए सड़क व पुल की समस्या को देखते हुए वर्तमान सरकार ने पुल के लिए पहले ही टेंडर करवा दिए हैं। पुल के फाउंडेशन कार्य को शुरू करने की लोनिवि से सिफारिश की गई है।