अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी दूरसंचार सेवाएं चरमराईं
इंटरनेट ठीक से नहीं चलने पर हिमकेयर योजना में पंजीकरण नहीं करवा पा रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय इलाकों में बेहतर दूरसंचार और इंटरनेट सेवा मुहैया करने के मकसद से मनाली-केलांग के बीच बिछाई गई ऑप्टिकल फाइबर केबल में अरबों रुपये पानी की तरह बहाया गया। लेकिन जनता को इसका फायदा नहीं मिल रहा। इंटरनेट सेवाएं सुचारु न होने से लोगों को हिमकेयर योजनाओं में पंजीकरण करवाना मुश्किल हो रहा है।
सरकार ने हिमकेयर स्वास्थ्य बीमा योजना पंजीकरण करने की तिथि को बढ़ा दिया है। इसके बावजूद जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में 50 फीसदी से अधिक लोग अभी भी पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके हैं। इसका कारण भारत संचार निगम लिमिटेड की ढुलमुल इंटरनेट सेवा है। पिछले साल सितंबर माह से लाहौल घाटी में मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवा पटरी से उतर गई है। इंटरनेट सेवा ठीक न होने कारण बीते वित्त वर्ष में विकास को जारी डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि लैप्स हो गई। कई स्कूली विद्यार्थी मेडिकल और इंजीनियरिंग के एंट्रेंस परीक्षा फॉर्म भरने से वंचित रहना पड़ा। घाटी में बीएसएनएल के अधिकारियों को एक ही जवाब मिलता है कि ओएफसी ठप है। हालांकि बीआरओ ने मनाली केलांग के बीच सड़क चौड़ा करने का काम पूरा कर लिया है। इसके बावजूद ऑप्टिकल फाइबर केबल कैसे कट रही है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इंटरनेट सेवा ठप होने से 14वें वित्तायोग के बजट को खर्च करना पंचायतों के लिए चुनौती बना है। ऑनलाइन रिपोर्ट जमा करवाने के लिए महकमों को हर तीसरे दिन एक कर्मी को 200 किमी दूर कुल्लू भेजना पड़ रहा है। थ्रीजी लाइन कटने से लाहौल के एक साथ कई टावरों को केलांग एक्सचेंज के साथ जोड़ा गया है। लिहाजा जिला मुख्यालय का एक्सचेंज भी हांफ गया है। घाटी में जिन दो आउटसोर्स कर्मियों के दम पर ऑप्टिकल फाइबर का काम चल रहा था, उन्हें पिछले सात महीनों से पगार नहीं मिली है। उधर, एसडीएम केलांग अमर नेगी का कहना है कि इंटरनेट सेवा सुचारु नहीं होने से सरकारी ऑनलाइन कामकाज निपटाने में दिक्कत पेश आ रही हैं। जिप अध्यक्ष रमेश रुआलवा ने कहा कि बीएसएनएल की ढुलमुल सेवा से जनजातीय लोग परेशान हैं।