जिला के बाह्य सराज की रघुपुर घाटी के करशाला गांव के दो भाइयों की चिताएं एक साथ जलीं। अपने कलेजे के टुकड़ों को मृत देख मां अपना होश हवास खोकर बेसुध हो गई। घाटी के सैकड़ों लोगों ने मंडी बस हादसे में काल का ग्रास बने दो सगे भाइयों भुवनेश्वर कटोच और राकेश कटोच को अंतिम विदाई दी। घाटी के सैकड़ों लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
मंडी के बिंद्रावणी बस हादसे में मौत के आगोश में समाए दो सगे भाइयों के शव शनिवार देर रात जैसे ही करशाला गांव पहुंचाए गए चीख पुकार के बीच पूरा गांव बिलक उठा। दोनों बेटों की मौत के बाद घर में अब मां अकेली रह गई है। उनके चचेरे भाई ने मुखाग्नि दी। रविवार सुबह दोनों भाइयों की एक साथ अर्थी उठी। रघुपुर घाटी के दर्जनभर गांवों के लोगों ने अंतिम विदाई दी। मां चीख पुकारों के बीच बेसुध हो गई। उन्हें सांत्वना देने के लिए गांव के लोग उमड़ पड़े। उसके पति की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अब बुढ़ापे के सहारे खोने से वह अचेत अवस्था में है।
जिला के करशाला गांव के रहने वाले 29 वर्षीय राकेश कटोच और 27 वर्षीय भुवनेश्वर भले ही भाई थे। लेकिन, वे दोस्तों की तरह रहते थे। शिक्षा के क्षेत्र में दोनों अव्वल थे। वे अपनी मां को कभी भी अपने पिता की कमी महसूस नहीं होने देते थे। बस हादसा जहां परिवारजनों और घाटी के लोगों को ताउम्र याद रहेगा। वहीं, मिलनसार दोनों भाइयों का आपसी प्यार और दोस्ताना लोग जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।