एनजीटी में घिरती जा रही कंपनी और सरकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देवसमाज की नजरें
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। बहुचर्चित 284 करोड़ के बिजली महादेव रोपवे का काम पिछले करीब तीन महीनों से बंद पड़ा है। रोपवे का मामला एनजीटी में पहुंचने के बाद सरकार और निर्माण करने वाली कंपनी घिरती जा रही है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार और कंपनी से एनजीटी ने जबाव भी मांगा है। एनजीटी में बिजली महादेव रोपवे के विरोध में दो याचिकाएं लगी हैं। एनजीटी ने दोनों मूल आवेदनों में बिजली महादेव में 2.4 किलोमीटर लंबी रोपवे परियोजना के निर्माण में पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन के संबंध में समान मुद्दा शामिल होना पाया है। जनहित याचिका दायर करने वाले आवेदकों की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने तर्क दिया है कि परियोजना का क्रियान्वयन रवि इंफ्राबिल्ड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, राजस्थान के माध्यम से किया जा रहा है, इसलिए परियोजना प्रस्तावक को भी पक्षकार बनाया जाना आवश्यक है। इसे एनजीटी ने स्वीकार किया है।
गौर रहे कि बिजली महादेव रोपवे को लेकर लोगों का विरोध लगातार जारी है। नग्गर में हुई देव संसद (जगती) में देवी-देवताओं ने बिजली महादेव रोपवे पर नाराजगी जताई थी। बिजली महादेव रोपवे संघर्ष समिति और देवसमाज की ओर से हुए विरोध के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने संज्ञान लिया था। केंद्र सरकार की तीन सदस्य कमेटी ने दिल्ली में देवसमाज के सात सदस्यीय दल मुलाकात थी। कुल्लू से गए सात सदस्यीय दल में पूर्व सांसद एवं भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी शामिल थे। ऐसे में अब सबकी नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देवसमाज को खुशखबरी मिलने की उम्मीद है। बिजली महादेव मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष फतेह सिंह राणा ने कहा कि रोपवे के विरोध में पिछले दिनों दिल्ली में देवसमाज के लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के समक्ष पक्ष रखा है।
अब 27 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
बिजली महादेव रोपवे से जुड़े केस की अब अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। इससे पहले भी एनजीटी में इस मामले की सुनवाई हुई है। एनजीटी में लगे केस में सरकार और निर्माण कर रही कंपनी की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।