सैंज (कुल्लू)। जिले में नौकरी जाने और पर्यटन कारोबार ठप पड़ने के बाद अब लोग खेतीबाड़ी को प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजारों में खाद, बीज और खेतीबाड़ी के उपकरण का अधिक कारोबार हो रहा है। कोरोना कर्फ्यू के दौरान दुर्गम गांवों में बंजर पड़े कई खेतों में अब फसल लहलहा रही है। लोग नकदी फसलों को अधिक तरजीह दे रहे हैं।
मटर, टमाटर, गोभी, भिंडी और बैंगन की खेती में युवा आमदनी की संभावना तलाश रहे हैं। कई युवाओं ने प्राकृतिक खेती शुरू की है। घर में ही खाद तैयार कर फसलों में डाली जा रही है। सराहन गांव के युवक धनवीर सिंह ने बताया कि वह पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों को ट्रैकिंग करवाते है। लेकिन काम बंद होने से घर आ गए और खेतीबाड़ी में जुट गए है। दूसरा कोई संसाधन भी नहीं था। ऐसे में बंजर पड़े खेतों को फिर उपजाऊ बनाया गया है। टमाटर और मटर की खेती की गई है। उधर, दुकान में काम करने वाले मनोज कुमार भी इन दिनों खेतों में पसीना बहा रहे है। कहा कि खेतों के लिए पावर टिलर लेकर आए और अब इसी क्षेत्र में रोजगार की संभावना तलाश रहे है। सैंज बाजार में बीज और खाद का व्यापार करने वाले बिहारी लाल राणा ने बताया कि बीते वर्षों की तुलना में इस बार नकदी फसलों के बीज की भारी मांग है। लोग तरह-तरह की खेती कर रहे हैं। ऑर्गेनिक खाद की मांग भी बढ़ी है। बागवानी के साथ खेती के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। खेतीबाड़ी के आधुनिक उपकरण के विक्रेता मोहर सिंह का कहना है कि बाजार में पावर टिलर, स्प्रे पंप, घास कटर आदि उपकरणों की मांग में उछाल आया है। लोग आधुनिक तकनीक से खेती करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। समाजसेवी राजेंद्र चौहान ने बताया कि कोरोना काल में लोगों की जीवनशैली बदली है। बाहरी राज्यों में रहने वाले कई लोगों ने अपने पुश्तैनी गांव का रुख किया और खेतीबाड़ी को बल मिला है। कृषि विभाग के जिला अधिकारी प्रकाश कश्यप ने कहा कि किसानों को इस बार गेहूं और मक्की के अलावा कोदरे का बीज भी वितरित किया गया है। इसे लोगों ने इस बार हाथोंहाथ खरीदा है।