कुल्लू। चरस के लिए अब पार्वती नहीं, बल्कि बंजार घाटी बदनाम हो रही है। चरस माफिया ने भी बंजार को नया ठिकाना बना लिया है। बंजार में चरस माफिया की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। यहां लगातार चरस की बड़ी खेप मिलने का सिलसिला जारी है।
हिमाचल प्रदेश के इतिहास में अभी तक की सबसे बड़ी खेप भी बंजार से बरामद हुई है। पुलिस की नजर से बचने के लिए चरस माफिया बंजार में ही अधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। बंजार घाटी में बढ़ती नशे की गतिविधियों को देखकर यहां के बुद्धिजीवियों ने चिंता जाहिर की है। बंजार क्षेत्र में एक साल के दौरान कई किलो चरस आरोपी पकड़े गए। गौर रहे कि जनवरी 2021 में पुलिस टीम ने घरटगाड़ में माइनस 4 डिग्री तापमान में आठ घंटे जंगल में घात लगाकर चरस के सप्लायर और खरीदने वालों से करीब 111 किलो ग्राम चरस बरामद की थी। एनडीपीएस एक्ट बनने के 35 वर्षों के बाद पहली बार इतनी बड़ी चरस की खेप पकड़ी गई थी। इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3 करोड़ 35 लाख रुपये थी। इसी रात पुलिस ने जंगल में दो घंटे ट्रैकिंग कर सजाहू गांव में दो संदिग्धों के घर दबिश दी थी। इस घर से एक आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस ने 11.588 किलो चरस भी बरामद की थी। फरवरी 2020 में सेरीबेहड़ के पास पुलिस ने बंजार के एक स्थानीय व्यक्ति को पौने बारह किलो चरस के साथ गिरफ्तार किया था। 17 मार्च 2020 को तीर्थन के तहत आने वाले शाईरोपा में गाड़ी की तलाशी के दौरान आठ किलो चरस पकड़ी थी। इसके साथ ही जनवरी 2020 में बंजार थाने के तहत फागू पुल के पास एक टाटा-407 ट्रक में तलाशी के दौरान 42 किलो चरस बरामद की। यह पुलिस की ओर से पिछले 17 सालों में पकड़ी गई चरस की सबसे बड़ी खेप थी। अब आईटीआई प्रशिक्षु से चार किलो चरस बरामद होने से एक बार फिर चरचा हो रही है। पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने कहा कि चरस माफिया का बंजार नया अड्डा नहीं बना है। इससे पहले भी यहां गतिविधियां थी। लेकिन यह पकड़ में नहीं आती थी। पुलिस का नशे को जड़ से उखाड़ने के लिए अभियान जारी रहेगा।