भूस्खलन के चलते गांव के नौ परिवारों ने छोड़ा घर, एक गोशाला भी ढही
ग्रामीणों की मांग, सरकार और जिला प्रशासन प्रभावितों को दें उचित मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले का बनाला गांव समय के एक पुराने जख्म को फिर से जी रहा है। 35 साल पहले बारिश ने गांव को उजाड़ दिया था। वही मंजर एक बार फिर लौट आया है।
नौ परिवारों को अपने घरों से उजड़ना पड़ा, एक गोशाला ढह गई, पेड़ों की जड़ें तक बह गईं। पहाड़ों ने फिर दिखाया कि वह जब टूटते हैं तो सिर्फ जमीन ही नहीं, रिश्ते भी दरकते हैं। गांव के लोग अब भी इंतजार में हैं कि क्या इस बार सरकार सुनने आएगी या फिर मुआवजा फिर से किसी फाइल में दब जाएगा।
गांव में भूस्खलन से एक गोशाला गिर गई। इसमें रखी गाय और अन्य पशु बाल-बाल बच गए। लोग इन्हें समय रहते दूसरी जगह ले गए हैं। भले ही चार दिनों से मौसम खुल गया है लेकिन बीच-बीच में बारिश होने से लोग सहमे हुए हैं। भूस्खलन लगातार जारी है। अब तक नौ परिवार घर खाली कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं। ग्रामीण धर्म सिंह, किशोरी लाल, ढेब राम, केवल, रेवती नंद, बेली राम, कमलू राम, जगदीश ठाकुर, सुंदर सिंह, भगवान सिंह और संजय कुमार ने कहा कि 30 अगस्त से चार सितंबर तक बारिश से भारी भूस्खलन हो गया है। इसमें देवदार और सफेदा के हरे-भरे दब गए हैं। उन्होंने कहा कि 1990 से 1993 तक यह गांव लगातार बारिश से प्रभावित रहा है। चार घर भूस्खलन से ढह गए थे। सेब बगीचों के साथ लगभग 100 बीघा जमीन मलबे में तब्दील हो गई थी। इसका ग्रामीणों को आज तक न तो मुआवजा मिला और न ही लोगों को जमीन मिली थी। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से बनाला गांव के लोगों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। स्थानीय पंचायत प्रधान दौलत चौहान ने कहा कि पंचायत इसकी रिपोर्ट प्रशासन को भेजेगी।
अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार ने कहा कि नुकसान का जायजा लेकर राजस्व विभाग से रिपोर्ट मांगी जाएगी। प्रभावित लोगों की हर संभव मदद की जाएगी।