तापमान गिरने से थमी मधुमक्खियों की गतिविधि, उत्पादन घटने की आशंका
सेब के फूलों का परागण झड़ने का खतरा
बिगड़े मौसम ने बढ़ाई बागवानों की चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण मैदानी इलाकों में बारिश और ऊपरी क्षेत्रों में बर्फबारी से तापमान लुढ़क गया है। एकाएक तापमान कम होने से सेब की सेटिंग पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
इन दिनों सेब के पौधों पर भरपूर फ्लावरिंग का दौर चला हुआ है। ऐसे में मौसम साफ रहना जरूरी है। मौसम के बिगड़े मिजाज से बागवानों की चिंता बढ़ा दी है।
बागवानी विषेशज्ञों की मानें तो भरपूर फ्लावरिंग के समय मौसम का साफ रहना लाजिमी है। बारिश और बर्फबारी के चलते मधुमक्खियां फूलों पर परागण एकत्रित करने में समर्थ रहती हैं। 22 से 25 डिग्री तापमान में मधुमक्खियां फूलों पर मंडराती और परागण को एकत्रित करती हैं। अधिक ठंड होने से मधुमक्खियां अपने छत्ते से बाहर नहीं निकलती हैं और कार्य करना भी बंद करती हैं।
बगीचों में करीब 33 फीसदी पॉलीनेशन वैरायटी का होना जरूरी है। ऐसे में सेब की सेटिंग और गुणवत्ता बेहतरीन हो जाती है।
घाटी के बागवान महेश, अनिश भंडारी, नवीन, बुद्धि प्रकाश, सुशील ,ज्ञान ठाकुर, देवराज नेगी ने कहा कि ठंड के कारण तापमान में गिरावट हो रही है, जो सेब सेटिंग के लिए उचित नहीं है। फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा का कहना है कि निचले क्षेत्रों में तो सेब सेटिंग प्रक्रिया चल रही है। अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की फ्लावरिंग का दौर चल रहा है। बिगड़े मौसम से पॉलीनेशन नहीं होने से सेटिंग पर प्रतिकूल असर होगा। ऐसे में सेब का उत्पादन कम हो सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
फ्लावरिंग के समय मौसम का साफ रहना जरूरी है, तभी मित्र कीट पॉलीनेशन बेहतर करते हैं। ठंड के कारण मधुमक्खियां भी कार्य नहीं करती हैं। 22 से 25 डिग्री तापमान का होना अति आवश्यक है।
राजकुमार, उपनिदेशक बागवानी विभाग, कुल्लू