कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के समापन के बाद बुधवार से ढालपुर में फड़ी बाजार सजना शुरू हो गया है। उत्सव के दौरान यह बाजार नहीं लगाया जाता है लेकिन देवी-देवताओं के अपने देवालयों की ओर लौटने के बाद यहां फड़ियां लगनी शुरू हो गई हैं।
इसके साथ ही बाजार में खरीदारी का दौर भी शुरू हो गया है। कुछ कारोबारी अपनी दुकानें सजा चुके हैं, जबकि अन्य स्थानों पर दुकानें लगाने का काम जारी है। दशहरा उत्सव समिति ने वर्ष 2025 से फड़ी बाजार को उत्सव के सात दिन बाद लगाने का निर्णय लिया था।
इसका उद्देश्य उत्सव के दौरान देवी-देवताओं की आवाजाही और देव समाज के लोगों को होने वाली असुविधा को दूर करना था। इस व्यवस्था के चलते उत्सव समिति को करीब 50 लाख रुपये का नुकसान भी हुआ था। समिति का तर्क था कि सात दिन तक देवी-देवता दशहरा मैदान में विराजमान रहते हैं और एक-दूसरे के अस्थायी शिविरों में आते-जाते हैं।
इस दौरान लोगों की भीड़ भी अधिक रहती है। ऐसे में फड़ी बाजार लगने से आवाजाही में परेशानी हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्सव संपन्न होने के बाद ही बाजार लगाने का निर्णय लिया गया। इस बार भी बुधवार से फड़ी बाजार सजना शुरू हो गया है। दशहरा उत्सव समिति ने बाजार को ठेके पर दिया है। ठेकेदार की ओर से कारोबारियों को फड़ी लगाने के लिए प्लॉट उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया निर्णय
दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि फड़ी बाजार लगने से उत्सव के दौरान आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए समिति ने बाजार को उत्सव संपन्न होने के बाद ही लगाने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था से उत्सव समिति को आर्थिक नुकसान हुआ है लेकिन लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।