न्यूली/लारजी (कुल्लू)। सैंज घाटी के शांघड़ में भोपाल की संस्था चक्रधर कल्चरल सेंटर की ओर से आयोजित चार दिवसीय ‘कथक रिट्रीट इन हिमालय’ कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने कथक की तकनीकी शिक्षा के साथ मानसिक शांति, रचनात्मकता और आत्मिक ऊर्जा का अनूठा अनुभव प्राप्त किया।
कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों को कथक की मूलभूत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें तत्कार (पैरों की थाप), हस्त मुद्राएं, शरीर संतुलन, चक्कर लेने की तकनीक तथा लय-ताल की समझ पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
दूसरे और तीसरे दिन प्रतिभागियों को भगवान शिव पर आधारित एक विशेष बंदिश सिखाई गई, जिसकी रचना कथक गुरु अभिमन्यु लाल ने की है। इस प्रस्तुति के माध्यम से प्रतिभागियों को कथक के आध्यात्मिक, भावात्मक और रचनात्मक पक्ष से परिचित कराया गया। चक्रधर कल्चरल सेंटर की अध्यक्ष प्रीति मोदगल तिवारी ने कहा कि संस्था की यह पहल भारतीय शास्त्रीय नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। संवाद