ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ही रहा पांच प्रतिशत तक सेब का तुड़ान
आपदा से सेब दाम घटने से जिले के बागवानों में छाई मायूसी
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में सेब सीजन धीरे-धीरे सिमटने लगा है। घाटी के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन खत्म हो गया है लेकिन ऊंचाई वाले इलाकों में अब मात्र पांच प्रतिशत सेब की फसल रह गई है।
इस बार बागवानों को सेब के रेट उम्दा नहीं मिले हैं। ऐसे में बागवान मायूस नजर आ रहे हैं। बागवानों का कहना है कि कम कीमत मिलने से उन्हें आर्थिक तौर पर नुकसान झेलना पड़ रहा है।
जिले में भारी बरसात से बागवानों को सेब का रेट भी उम्दा नहीं मिला है। वाजिब दाम न मिलने से साल भर की मेहनत पर पानी फिर रहा है। घाटी के बागवान अमित ठाकुर, कैलाश ठाकुर, अरुण ठाकुर, सुनील ठाकुर, चमन, बुद्धि प्रकाश शर्मा, अखिल ठाकुर और ज्ञान ठाकुर ने कहा कि बागवानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी है।
बागवानों ने कहा कि सेब की फसल को पैदा करने के लिए साल भर काफी मेहनत और खर्च करना पड़ता है। पहले बागवानों को ओलावृष्टि और अंधड़ के कारण काफी नुकसान हुआ है। रही-सही कसर भारी बरसात ने पूरी कर दी है। सड़कें टूटने से बागवानों को भारी नुकसान पहुंचा है। सेब की गुणवत्ता पर असर पड़ने से मंडियों में कम दाम मिले हैं।
फलोत्पादक मंडल कुल्लू के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ही सेब की फसल शेष रही है। सेब सीजन अंतिम चरणों में है। बंदरोल सब्जी मंडी के आढ़ती मोहन ठाकुर ने कहा कि अब मंडियों में बहुत कम सेब पहुंच रहा है। नवंबर के पहले सप्ताह सेब का सीजन खत्म हो जाएगा। शुक्रवार को बंदरोल में 25 से 50 रुपये किलो सेब की बोली लगी है।