बागवान बोले- सेब का आकार और रंग अच्छा होने के बाद भी नहीं मिल रहे अच्छे दाम
ठेके पर बगीचे न देने वाले बागवानों को प्रति पेटी मिल रहे 1,000 से 1,200 रुपये दाम
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में सेब का तुड़ान शुरू हो गया है। घाटी के अधिकतर बागवानों ने सेब के बगीचे व्यापारियों को ठेके पर ही दे दिए हैं।
जिन बागवानों ने सेब ठेके पर नहीं दिया है, उनका सेब 1,000 से 1,200 रुपये तक प्रति पेटी के हिसाब से बिक रहा है।
बागवानों के अनुसार पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार सेब के दामों में थोड़ा उछाल है लेकिन इस बार उत्पादन कम है। सेब का आकार और रंग अच्छा होने के बावजूद बागवानों को सेब के उम्दा दाम नहीं मिल रहे हैं। बागवानों ने कहा कि घाटी में सब्जी मंडी नहीं है। इसका बिचौलिए पूरा फायदा उठाते हैं।
लाहौल घाटी में 1170 हेक्टेयर क्षेत्र में सेब का उत्पादन हो रहा है। लाहौल में करीब 4600 किसान परिवार हैं। इनमें 2500 परिवार कृषि और बागवानी से जुड़े हैं। बागवानी विभाग लाहौल से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दो दशकों से अधिक समय से घाटी के किसान कृषि के साथ बागवानी से जुड़े हैं।
लाहौल की पट्टन घाटी में सबसे अधिक सेब का उत्पादन हो रहा है। प्रगतिशील बागवान सुरेश कुमार, रमेश लाल और वीर सिंह ने बताया कि इस बार सेब का उत्पादन भले ही कम है लेकिन सेब की गुणवत्ता बेहतर होने के बावजूद बागवानों को अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। उधर, बागवानी विभाग के एचडीओ प्यारे लाल शर्मा ने बताया कि इस समय लाहौल में 1170 हेक्टेयर जमीन में सेब का उत्पादन हो रहा है।