मयाड़ घाटी की सड़क की बहाली में जुटी लोक निर्माण विभाग की मशीनें।
केलांग (लाहौल-स्पीति)। जिले की अति दुर्गम मयाड़ घाटी के लोगों में लोक निर्माण विभाग के प्रति भारी रोष है। उदयपुर से खंजर तक 32 किमी संपर्क सड़क की बहाली में एक माह से अधिक समय हो गया है मगर खंजर गांव की सड़क यातायात के लिए बहाल नहीं हो पाई है। इस सड़क से तिंगरेट और चिमरेट दो पंचायतों की आबादी तीन माह से अधिक समय से उपमंडल मुख्यालय उदयपुर से नहीं जुड़ पाई है।
सड़क बहाल नहीं होने से लोगों को उदयपुर के लिए पैदल चलना पड़ रहा है। इसमें खासकर बीमार लोगों को अधिक परेशानी हो रही है। विभाग की मशीन 32 किमी लंबी सड़क पर अभी 16 किमी से आगे नहीं बढ़ पाई है। हालांकि इस सर्दी में बर्फबारी अधिक हुई और तीन-चार नालों से होकर गुजरने वाली सड़क में कई हिमखंड भी गिरे हैं।
मयाड़ घाटी जनवरी के बाद से उपमंडल, जिला मुख्यालय के साथ देश-दुनिया से अलग-थलग है। क्षेत्र में मोबाइल सिग्नल भी बाधित चल रहा है। चिमरेट पंचायत प्रधान प्रेम दासी ने कहा कि मयाड़ घाटी के लोगों का जीवन इस सर्दी में काफी कठिन रहा है। कई दिनों तक बिजली गुल रही और अब मोबाइल सिग्नल भी गायब है।
उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया है कि मयाड़ घाटी की संपर्क सड़क बहाली में तेजी लाई जाए। कहा कि उदयपुर से अटल टनल रोहतांग तक सड़क बहाल हो जाती है, मगर मयाड़ घाटी की सड़क की बहाली में देरी की जा रही है। अगर कोई बीमार हो जाए तो उसे उपचार के लिए ले जाना चुनौती बन जाता है। अधिशासी अभियंता पवन राणा ने कहा कि मयाड़ सड़क की बहाली का कार्य तेजी से चल रहा है। सड़क में गिरे भारी हिमखंडों को साफ करने में समय लग रहा है। मयाड़ सड़क बहाली में दो डोजर और दो जेसीबी मशीन लगाई गई हैं। संवाद