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सेब के उचित दाम न मिलने पर बागवानों में रोष

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कुल्लू जिला में सेब की पैकिंग करने में जुटे पैकर। - फोटो : Kullu
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कुल्लू/खराहल। सूबे के बागवानों को इस साल सेब के बेहतर दाम नहीं मिल रहे हैं। रॉयल सेब के मूल्य ही कम होने से बागवानों को भारी नुकसान हो रहा है। गोल्डन सेब तो अभी बगीचों में लहलहा रहा है। कम दाम के कारण इस वैरायटी के सेब का तुड़ान अभी बागवान नहीं कर रहे हैं। जिला कुल्लू में करीब 60 फीसदी सेब सीजन सिमट गया है। अभी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 40 फीसदी सेब शेष रह गया है। जिला कुल्लू में एक करोड़ सेब पेटी का उत्पादन होता है लेकिन इस साल 50 लाख पेटी होने की संभावना है। शुरूआती दौर में बर्फबारी और अंधड़ के कारण सेब फसल को काफी नुकसान हो गया। ऐसे में 50 लाख पेटियों का उत्पादन तक पहुंचना असंभव है। जिला में 70 हजार परिवार सेब कारोबार से प्रत्यक्ष तौर से जुड़े हैं। बागवान सरकार पर दवाब डाल रहे हैं कि सेब के मुनासिब दाम मुहैया करवाए। हिमाचल के सेब उत्पादित क्षेत्रों में बागवान लामबंद होने लगे हैं। सरकार से कश्मीर के सेब की तरह हिमाचल में भी एमएसपी की तर्ज पर सेब को खरीदने की मांग करने लगे हैं। प्रदेश में सेब सात जिलों में पैदा हो रहा है। इससे सूबे की आर्थिकी पर भी खासा प्रभाव पड़ता है। हिमाचल के किसानों को मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सी ग्रेड का सेब 9.50 रुपये प्रतिकिलो समर्थन मूल्य दिया जाता है, जो बहुत ही कम है। सेब सीजन में तेजी आने से सेब के दाम भी लुढ़क गए हैं। सेब दामों में अचानक गिरावट आना बागवानों के लिए चिंता का विषय है। सदर फल एवं सब्जी उत्पादक संगठन कुल्लू के प्रधान लाल चंद ठाकुर ने कहा कि बागवान लंबे वक्त से सरकार से मसला उठाते रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर सूबे में भी सेब का समर्थन मूल्य 60, 40 और 25 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से दिया जाए। इससे बाजार में स्थिरता बनी रहेगी। उधर, कुल्लू फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष
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प्रेम शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार को मंडी मध्यस्थता योजना के तहत बागवानों से 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से सेब की खरीद करनी चाहिए।
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