सेब के पेड़ों पर दवाई के छिड़काव की सलाह
तुड़ान के बाद टहनियों को हुए नुकसान की होगी भरपाई
बगीचाें में कॉपर ऑक्सी क्लोराइड का करें छिड़काव
600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में बना लें घोल
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में तुड़ान के बाद अब सेब के बगीचों में लगे पेड़ खाली नजर आने लगे हैं। वहीं, सेब तुड़ान के दौरान पेड़ों की टहनियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बागवान कॉपर ऑक्सी क्लोराइड दवा का छिड़काव करें। बागवानी विशेषज्ञ बागवानों को दवा का समय रहते छिड़काव करने की सलाह दें रहे हैं। बगीचों में सेब तुड़ान के दौरान कई पेड़ों की टहनियां टूट जाती हैं। ऐसे में टहनियों पर जख्म होने से कई रोग पनप जाते हैं। इन रोगों से पेड़ों को बचाने के लिए दवाई का छिड़काव आवश्यक है।
जिले के निचले अधिकांश इलाकों में सेब का तुड़ान खत्म हो गया है या अंतिम चरण में है लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी सेब सीजन अक्तूबर तक चलने की संभावना है। घाटी के बागवान अमित, चमन, कर्मचंद, रामनाथ, जयचंद, प्रताप पठानिया, देवराज नेगी आदि ने कहा कि सेब तुड़ान अंतिम चरणों में पहुंच गया है। बगीचों में देरी से पकने वाली किस्म का तुड़ान चल रहा है। अक्तूबर के अंतिम पखवाड़े तक सेब तुड़ान खत्म हो जाएगा। बागवानी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में सेब तुड़ान समाप्त हो चुका है, उन बगीचों में बागवान कॉपर ऑक्सी क्लोराइड दवा का छिड़काव करना शुरू कर दें। इससे बगीचों में लगे सेब के पेड़ और पौधे विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रहेंगे। उद्यान विभाग के उपनिदेशक बीएम चौहान ने कहा कि जिन बगीचों में बागवानों ने सेब का तुड़ान समाप्त कर दिया है, उनमें बागवान कॉपर ऑक्सी क्लोराइड दवा का 600 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इससे विभिन्न रोगों के साथ कैंकर की समस्या से भी निजात मिल जाएगी।