सीएमओ कुल्लू ने लिखित आदेश जारी करते हुए चिकित्सकों को कहा है कि सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही 56 दवाइयों में ही मरीज को लिखें। उपलब्ध दवाइयों की लिस्ट चिकित्सकों को सौंप दी गई है। इस आदेश के बाद लोगों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने को मजबूर नहीं होना होगा।
सीएमओ की ओर से लिखित आदेश के अनुसार जो चिकित्सक मरीज को सरकार की ओर उपलब्ध करवाई जा रही 56 दवाइयों के अलावा बाहर से लिखा तो वह कार्रवाई को भी तैयार रहें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी वाईडी शर्मा ने कहा कि कुछ दिनों में सरकारी अस्पतालों में इन दवाइयों की खेप पहुंच जाएगी।
जिला मुख्य अधिकारी ने बताया कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू, बंजार अस्पताल, पीएचसी सैंज, पीएचसी जरी और पीएचसी सैंज में डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि मरीज की पर्ची पर सरकारी दवाई ही लिखें। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली 56 दवाइयां अभी तक जिला में उपलब्ध नहीं हो पाई है। फरवरी के अंत तक यह दवाइयां अस्पतालों में उपलब्ध हो जाएंगी।
आमतौर पर होता है कि डॉक्टर मरीजों की पर्ची पर ऐसी दवाइयां लिखते हैं जो अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं होती। मजबूरी में लोगों को यह दवाइयां मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती है। जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कुल्लू वाईडी शर्मा ने कहा कि जिला में चल रहे सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात चिकित्सकों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके लिए बाकायदा दवाइयों की लिस्ट भी डॉक्टर के पास रहेगी।
सरकारी अस्पतालों में सरकार की ओर से दवाइयां मुहैया करवाई जाती है, लेकिन चिकित्सक कंपनी से मोटी कमीशन के चक्कर में ऐसी दवाइयां लिखते है जो अस्पताल में मौजूद नहीं होती। दवाइयां ऐसी कंपनियों की लिखी जाती है जहां से चिकित्सकों को मोटी कमीशन मिलती है।
दवा बनाने वाली निजी कंपनियां अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से चिकित्सकों तक पहुंचती है। जहां वह कंपनी के प्रोडक्ट के बारे में बताते हैं। चिकित्सकों के साथ उनकी कंपनी की दवाइयां लिखने की कमीशन भी तय होती है। कमीशन के रूप में 35 फीसदी या इससे अधिक की कमीशन, विदेश टूर, मोटी रकम के गिफ्ट हैंपर आदि शामिल होते है।