केलांग (लाहौल-स्पीति)। पहले रोजगार के लिए धक्के खाए और अब वेतन के लिए तरस गए हैं। जी हां! लाहौल में स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों को करीब एक साल से वेतन नहीं मिला है। वेतन नहीं मिलने से इन शिक्षकों की आर्थिकी पूरी तरह पटरी से उतर गई है। कई शिक्षकों को उधार के राशन से अपने परिवार का पेट भरना पड़ रहा है। जबकि, ये अध्यापक पूरी ईमानदारी के साथ स्कूलों में नौनिहालों को तालीम दे रहे हैं। पानी सिर से ऊपर बहता देख अब इन शिक्षकों के अभिभावकों ने शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग कभी बजट तो कभी आश्वासनों का लोलीपॉप दिखा कर ठगता आ रहा है। वीरवार को अभिभावकों ने विधायक रवि ठाकुर को ज्ञापन भेजा है। अभिभावक राजेंद्र कटोच, अमर सिंह, रणवीर, दोरजे और टशी का कहना है कि उनके बच्चे एसएमसी के माध्यम से लाहौल के सरकारी स्कूलों में बतौर शिक्षक तैनात हैं। उनके बच्चे ईमानदारी के साथ कम वेतन पर भी स्थायी अध्यापकों के बराबर मेहनत कर नौनिहालों को तालीम दे रहे हैं। लेकिन, करीब एक साल से उन्हें वेतन नहीं दिया गया है। वेतन नहीं मिलने के कारण कई शिक्षकों पर दुकानदारों की देनदारी बढ़ गई है। ऐसे में कई शिक्षक मानसिक तानव के दौर से गुजर रहे हैं। इधर, शिक्षा उपनिदेशक प्रेमनाथ परशीरा ने बताया कि प्रवक्ताओं को वेतन दे दिया गया है, जबकि शिमला शिक्षा निदेशालय से गलती से लाहौल का बजट स्पीति को भेज दिया गया है। इसके चलते एलटी और टीजीटी को वेतन नहीं मिल पाया है। परशीरा ने बताया कि उन्हाेंने खुद निदेशक शिक्षा विभाग से बात की है। बजट जारी होते ही शिक्षकों को वेतन दे दिया जाएगा।