कुल्लू। प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में मई में दिसंबर की ठंड महसूस की जाने लगी है। आलम यह है कि बारिश के साथ ही चोटियों और ऊंचाई वाले रिहायशी इलाकों में अभी भी बर्फबारी का दौर जारी है। यहां के बुजुर्ग लोगों का कहना कि घाटी में ठंड ने पिछले करीब दो दशकों का रिकार्ड तोड़ा है। बीते तीन दिन से कुल्लू और लाहौल घाटी में बारिश की फुहारों के साथ ही रोहतांग दर्रा समेत घाटी की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी हुई है। इसके चलते लाहौल घाटी में दिन का पारा सामान्य से करीब पांच से सात डिग्री सेल्सियस लुढ़क गया है। ठंड के कारण लाहौल घाटी की पट्टन, चंद्रा और तोदवैली में मटर बिजाई का काम भी प्रभावित हो रहा है। रविवार को रोहतांग में एक फुट और इससे सटी चोटियों पर करीब आधा से पौना फुट बर्फबारी हुई है। ठंड के कारण घाटी में लोग फिर गर्मवस्त्र पहनने को मजबूर हो गए हैं। सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल योगेश नायर ने बताया कि खराब मौसम के कारण रोहतांग में बारिश के साथ बर्फबारी हुई है। इससे दर्रे पर न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे चल रहा है। उधर, घाटीवासी जय राम तथा तेनजिन तंडूप सहित बलदेव शर्मा ने बताया कि मध्य मई माह में इस तरह की ठंड होना हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि इसे पहले दो दशक पूर्व ऐसा मौसम महसूस किया गया था। कहा कि ठंड के कारण घाटी में कृषि कार्य भी प्रभावित होने लगा है।