बंजार (कुल्लू)। बंजार घाटी के गाड़ागुशैणी का सुप्रसिद्ध मेला आज शुरू हो गया है। महाऋषि मारकंडेय पेड़चा और माता जालपा जफूर की भव्य शोभा यात्रा के साथ पांच दिवसीय मेले का शानदार आगाज हो गया। इस मेले में जहां देवी-देवताओं का ऐतिहासिक मिलन होगा। वहीं, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
1764 ई. से सुकेत के राजा वीर सेन के शासनकाल से शुरू गाड़ागुशैणी मेले का आयोजन मार्कंडेय ऋषि पेड़चा और माता जालपा जफूर के सम्मान में प्रति वर्ष श्रावण मास की 14 और 15 प्रविष्टे को मंडी और कुल्लू सराज के अंतर्गत पड़ने वाले फतेहपुरगढ़, जूफरगढ़, बगड़ागढ़, गुसाईनगढ़ के देवी-देवता और उनकी हरियान संयुक्त रूप से मनाते हैं। कुछ वर्षों से इस मेले को पांच दिवसीय किया गया है ताकि मेले में ग्रामीण खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा सके।
इस मेले में चार गढ़ों के देवी-देवता मार्कंडेय ऋषि पेड़चा, माता जालपा, देवता भूमासी, देवता शनीश्चरी, सनपाल, देवता कांढे नाग, जुहलू नाग, देवता तुगासी, देवता रीधणी अपनी हरियानों के लाव लश्कर के साथ मेले में पहुंचे। मंडी और कुल्लू सराज के संगम स्थल गाड़ागुशैणी में मनाया जाने वाला यह मेला सैकड़ों वर्ष पुराने इतिहास को दोहराता है। इलाकावासी देवी सिंह, रोहित राम, तेजा सिंह, नरेंद्र कुमार ने कहा कि वर्षों से ग्रामीणों को इस उत्सव का इंतजार रहता है। मेले में जहां खेलकूद प्रतियोगिताएं करवाई जाएगी। वहीं, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।