अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। भुंतर के बड़ा भूईन पंचायत में रविवार को आयोजित जनमंच कार्यक्रम में लोगों ने लोक निर्माण, वन, राजस्व और आईपीएच विभाग के अधिकारियों का घेराव किया। लोगों की शिकायत पर मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने भी अधिकारियों से जवाब तलब किया। अधिकतर मामलों में अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
हलैणी गांव के सुभाष ने शिकायत की कि हलैणी गांव के ग्रामीणों को राजस्व विभाग ने बंदोबस्त करने के बाद वन अधिकारों से वंचित कर दिया है। ऐसे में उन्हें अब टीडी आदि नहीं मिल रही है। दासी देवी, गुरदास सिंह, वेद राम, चेत राम, मनी राम, नत्थू राम ने भी राजस्व संबंधी शिकायत की। पूईद गांव की मणि देवी ने बारिश से घर को हुए नुकसान का मुआवजा न देने की शिकायत रखी। लाल चंद, कृष्णा देवी, सुदर्शना ने भी अपनी-अपनी शिकायतें रखी। हलैणी के गोपाल ठाकुर ने कहा कि बिजली महादेव बस रोगीमोड़ से आगे नहीं चल रही है। शिकायत करने पर एक महीना बस चलने के बाद इसे फिर से बंद कर दिया जाता है, जबकि निजी बस दो सालों से बंद है। इस पर मंत्री ने आरएम एचआरटीसी को सख्त निर्देश दिए। संगत राम, संजीव कुमार, हरिचंद ने कहा कि उनके घरों के ऊपर से बिजली की तारें गुजर रही हैं। ऐसे में हादसों की आशंका बनी हुई है। चौहकी गांव के मोहन लाल ने कहा कि बिजली की लाइन उनके बगीचे से होकर गुजर रही है। इससे सेब पौधों में करंट आ रहा है। राजकुमार ने कहा कि चंझड़ में हफ्ते तक पानी नहीं आता है। दीनदयाल ठाकुर ने श्लाधरा हलैणी पेयजल योजना बंद करने पर नाराजगी जाहिर की। त्रैहण नरोगी सड़क के निर्माण पर लोगों से सवाल खड़े किए कि सर्वे के बाद निर्माण नहीं हो रहा है। सोनिका ने फोरलेन से क्षतिग्रस्त रास्ते का मुद्दा उठाया। अनिता शर्मा ने घर का रास्ता रोके जाने संबंधी शिकायत रखी। सुम्मा देवी ने छमाहण से शाहण तक सड़क पक्का न करने को लेकर विभाग को घेरा। किंजा के सरचंद ने बिजली महादेव सड़क की समस्या उठाई। वीरनी के प्यारे चंद ने कहा कि उन्हें पानी नहीं दिया जा रहा है। इस पर मंत्री ने विभाग को पानी उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।
लोगों ने ये मसले भी उठाए
रोगीमोड़ से आगे नहीं जा रही निगम की बिजली महादेव बस
घरों, बगीचों से ऊपर से गुजर गुजर रहे विद्युत तार से खतरा बढ़ा
पानी, सड़क, बिजली, राजस्व के मुद्दों पर लोगों ने विभाग को घेरा
चंझड़ में हफ्ते तक नहीं मिलती पेयजल की सप्लाई, लोग परेशान
श्लाधरा हलैणी पेयजल योजना बंद करने पर हो रही अधिक मुश्किल