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मुराद लेकर शिरघन नाग की शरण में जाते है देवी देवता

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मुराद लेकर शिरघन नाग की शरण में जाते हैं देवी-देवता
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शक्ति से बारिश और अच्छी फसल के लिए जाने जाते हैं नाग
76 वर्षों के बाद दशहरा में पहुंचे ऊझी घाटी के अधिष्ठाता
देवता ने अत्याचारी पीति ठाकुर के वंश का किया था नाश
मनु शर्मा
मनाली (कुल्लू)। 76 वर्षों बाद देवता शिरघन ने दशहरा उत्सव में शिरकत की है। देवता ने भगवान रघुनाथ के उत्सव में भाग लेने की इच्छा जाहिर की थी। कुल्लू की पहली राजधानी जगतुसख के भनारा गांव के देवता शिरघन नाग 18 नागों में सबसे बड़े हैं आज भी क्षेत्र के देवलु धूप, बारिश और सुख समृद्धि के लिए इनके यहां हाजरी भरते हैं।
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देवता शिरघन का जन्म स्थल उझी घाटी में गौशाल गांव हुआ है। जहां पर 18 नाग और नारायण पैदा हुए थे। मान्यता है कि सूखा पड़ने पर बारिश और अधिक बारिश को रोकने के लोग देवता के दरबार में पहुंचते हैं। घाटी में किसी प्रकार की प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए घाटी के देवता भी अपने कारकूनों सहित शिरघन के पास हाजिरी लगाते हैं। भगवान राम के कुल गुरु वशिष्ठ ऋषि के कारकून आज भी भारी बारिश और सूखे से निपटने के लिए ढोल नगाड़ों के साथ शिरघन नाग के पास पहुंचते हैं। बताया जाता है कि देवी हिडिंबा की ओर से कुल्लू के राजपरिवार को भनारा के जैधार में राज पाठ दिया था। जहां का पूरा कार्य शिरघन नाग की ओर से किया जाता है। देवता के कारदार तेज राम ठाकुर ने बताया कि देवता शिरघन नाग की इच्छा पर देवरथ दशहरा में शरीक हुआ है। उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने बताया कि इस साल दशहरा में आए नए देवी देवताओं का समिति स्वागत करती है। नए देवी देवताओं के आने से मेले का स्तर और बढ़ेगा। महेश्वर सिंह ने कहा कि देवता शिरघन का आना दशहरे में खुशी की बात है।
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