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बिना पहचान पत्र दिखाए नहीं हो सकेंगे टनल से रेस्क्यू

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बाघा बॉर्डर को पार करने जैसा है टनल की जांच से गुजरना
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बिना पहचान पत्र दिखाए टनल से नहीं हो सकेंगे रेस्क्यू
बर्फ में फंसे लोगों को पहचान की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
नार्थ पोर्टल (लाहौल-स्पीति)। बर्फ में फंसे लोगों का रोहतांग टनल से निकलना बाघा बॉर्डर पार करने से भी मुश्किल है। बिना पहचान पत्र दिखाए बर्फ में फंसे लोगों को रोहतांग टनल से रेस्क्यू नहीं किया जाएगा। 6 दिन तक बर्फबारी और कड़ाके की ठंड से पहले ही हिम्मत हार चुके लोगों को रोहतांग टनल से निकलने के लिए बीआरओ की थकाऊ और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। एक सप्ताह तक बर्फबारी के बीच शीत रेगिस्तान में फंसने से कई सैलानी मानसिक और शारीरिक तौर पर कमजोर पड़ चुके हैं। ऐसे में रोहतांग टनल के नार्थ पोर्टल में टनल से गुजरने से पहले लोगों को बीआरओ की लंबी अनौपचारिक कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। लाहौल प्रधान संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश ताकी का कहना है कि आपदा के इस मुश्किल घड़ी में पहले फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। टनल से रेस्क्यू करने से पहले एक एक शख्स की पहचान, उम्र और मोबाइल नंबर नोट किए जा रहे हैं। कुछ सैलानी यहां तक कहते सुने गए कि रोहतांग टनल से गुजरना बाघा बॉर्डर को पार करने से मुश्किल है। नार्थ पोर्टल में पहचान बताने की यह प्रक्रिया जरूरत से अधिक थकाऊ होने कारण लोगों को घंटों भूखे पेट वाहनों में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। सैलानियों ने बताया कि पहचान पत्र बताने के बावजूद मोबाइल नंबर और अन्य ड्राइविंग लाइसेंस की मांग की जा रही है। जिससे 6 दिन तक बर्फ के बीच जिंदगी और मौत से जूझने के बाद जिंदा घर लौट अपने घर लौट रहे लोग बेहद हताश हो रहे हैं। निगम के क्षेत्रिय प्रबंधक मंगल चंद मनेपा ने बताया कि निगम की 5 बसों से सैलानियों और मजदूरों को टनल से रेस्क्यू किया गया है। नार्थ पोर्टल में तैनात बीआरओ के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह प्रक्रिया उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अपनाई जा रही है।
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