कुल्लू। विधानसभा चुनाव 2012 के मुकाबले इस बार लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिला में कांग्रेस का ग्राफ गिरा है। वहीं भाजपा ने बढ़त बनाई है। कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिला की पांच सीटों में से कांग्रेस तीन से सीधे एक सीट पर जा पहुंची है। वहीं भाजपा एक से दो सीटों के बाद इस बार चार सीटों तक पहुंच गई है।
कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिला में भाजपा ने चार सीटों के साथ धाक जमाई है। जबकि कांग्रेस ने जनता के बीच अपनी पैठ गवां दी है। 2012 के विस चुनाव में पांच में से तीन सीटों पर कांग्रेस थी। इनमें लाहौल-स्पीति, बंजार और आनी शामिल हैं। इस बार चुनाव में कांग्रेस ने पिछली बार जीती हुई तीनों सीटें हार गई हैं और कुल्लू की सीट पर कांग्रेस का जादू चला है। 2012 के विस चुनाव में भाजपा एक सीट मनाली पर ही सीमित थी।
हालांकि बाद में हिलोपा का भाजपा में विलय होने पर यह सीटें दो हुई थीं। इस बार यह आंकड़ा दोेगुना होकर चार पहुंच गया है। कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार मनाली सीट हाथ से गवां दी है। बंजार में कांग्रेस को झटका लगा है। वहीं, आनी में भी नए चेहरा मतदाताओं के बीच अपनी पैठ नहीं बना पाया। यहां पहले कांग्रेस का कब्जा था। बंजार में भाजपा के नए चेहरे सुरेंद्र शौरी का खूब जादू चला है। जबकि अन्य सभी नए चेहरे जनता के बीच अपनी धाक नहीं बना पाए। नतीजतन हार का सामना करना पड़ा। 11 उम्मीदवार पहली बार विस चुनाव लड़ रहे थे। इधर, जिला भाजपा अध्यक्ष भीम सेन शर्मा ने कहा कि भाजपा ने कुल्लू में तीन सीटें हासिल की हैं। जनता कांग्रेस की जनविरोधी नीतियों से तंग थी। जिस पर भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला है। वहीं, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बुद्घि सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की कुल्लू सीट पर बड़ी जीत हुई है। अन्य सीटों पर हार के कारणों का मंथन हो रहा है।
मनाली में 69 बूथों में भाजपा को लीड
मनाली विधानसभा क्षेत्र के 69 बूथों में भाजपा को लीड मिली है। वहीं 31 पर कांग्रेस ने परचम लहराया है। मनाली सीट में गोविंद ठाकुर ने हैट्रिक मारी है। जबकि कांग्रेस के हरि चंद शर्मा जीत से चूक गए।
आजाद प्रत्याशी नहीं दिखा पाए जादू
कुल्लू जिला के चारों विस क्षेत्र में आजाद प्रत्याशी और भाजपा-कांग्रेस को छोड़कर कोई तीसरा दल खास मत हासिल नहीं कर पाए। जीत के दावे करने वाले कई आजाद प्रत्याशी मिले मतों को देखकर चिंता में डूबे हुए हैं। एक हजार मतों की संख्या पार न करने वाले प्रत्याशी इन दिनों भूमिगत हो गए हैं।