केलांग (लाहौल-स्पीति)।
बर्फ के बीच फंसे लोगों को पांचवें दिन भी राहत नहीं मिल सकी। बर्फबारी के बाद रोहतांग दर्रा बंद होने के कारण कई लोग घाटी के विभिन्न हिस्सों में फंसे हैं। मंगलवार को बीआरओ ने लाहौल के कोकसर से तीन किमी दूर ग्रांफू से मिशन स्नो क्लीरेंस का काम शुरू किया। मनाली में मढ़ी के बंतामोड़ से रोहतांग की तरफ बर्फ हटाने का काम शुरू किया। सीमा सड़क संगठन के कमांडर कर्नल एके अवस्थी ने बताया कि मंगलवार को मौसम साफ रहने के कारण बर्फ हटाने में काफी प्रगति हुई। कहा कि देर शाम तक लाहौल की तरफ से रोहतांग के सिरे तक बर्फ हटाया जा रहा है।
जबकि मढ़ी की ओर से राहनीनाला तक बर्फ हटा दी है। कर्नल एके अवस्थी ने दावा किया है कि बुधवार देर शाम तक रोहतांग दर्रा को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। रोहतांग बहाल होने के बाद पहले लाहौल घाटी में फंसे लोगों को बाहर निकाला जाएगा। वहीं रोहतांग सुरंग के भीतर से आम लोगों की आवाजाही को लेकर हुई बैठक बेनतीजा रही। रोहतांग टनल प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता कर्नल चंद्रा राणा ने बताया कि घाटी में फंसे लोगों को रोहतांग दर्रा होकर रेस्क्यू किया जाएगा। सर्दियों में भारी बर्फबारी के बीच घाटी में फंसने वाले मरीजों और अन्य जरूरतमंद लोगों को किस तरह रोहतंाग सुरंग होकर रेस्क्यू किया जाए, इसको लेकर लाहौल-स्पीति प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा। कर्नल चंद्रा राणा ने बताया कि बर्फ के बीच फंसने वाले मरीजों को पहले मेडिकल बोर्ड से एमरजेंसी घोषित होने के बाद टनल प्रबंधन उनके रेस्क्यू को लेकर विचार करेगी। ...
फंसे लोगों के लिए फरिश्ता बने उपासक
केलांग। बर्फ के बीच लाहौल घाटी में फंसे बाहरी लोगों की मदद को स्थानीय लोग आगे आए हैं। केलांग में फंसे करीब 25 लोगों को स्थानीय पंचायत उपप्रधान दोरजे उपासक ने अपने स्तर पर कमरा उपलब्ध करवाया है। उपासक उनके लिए निशुल्क खाने का व्यवस्था भी कर रहे हैं। उपासक ने बताया कि यह लोग बिहार, नेपाल, उत्तराखंड और हिमाचल के हैं। ये लाहौल में मजदूरी के लिए आए थे।