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घी की धार से श्रद्धालुओं ने की झील की परिक्रमा

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुल्लू। 10500 फीट की ऊंचाई पर विराजमान माता बूढ़ी नागिन की वास स्थली सरयोलसर में बैसाख संक्रांति को श्रद्धालुओं की भारी उमड़ी। माता के कपाट खुलते ही बर्फ से लकदक पवित्र झील के चारों ओर श्रद्धालुओं ने घी की धार से परिक्रमा की। माता की झील जहां जमी हुई है, वहीं मई माह से माता के देवालय में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू होगी। पिछले साल कम बर्फबारी होने से माता के कपाट चैत्र माह में ही खुल गए थे।
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बैसाख संक्रांति के उपलक्ष्य पर रविवार को उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से सरयोलसर माता के जयकारों से गूंज उठा। लोगों ने करीब चार माह बाद माता के दर्शन किए। संक्रांति को सरयोलसर में लगने वाले बैसाख मेले के लिए लोग दूर-दूर से माता के दर्शन को पहुंचे थे। कई लोग मन्नत पूरा होने पर यहां पहुंचे। करीब एक किलोमीटर की परिधि में फैली झील के चारों ओर घी की फेरी (परिक्रमा) की। अब श्रद्धालु नवंबर माह तक दर्शन कर सकेंगे। माता के कारदार भागे राम राणा ने कहा कि बैसाख संक्रांति को सरयोलसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। उन्होंने कहा कि इस साल हुई रिकॉर्ड बर्फबारी के चलते माता की झील के साथ पूरी वास स्थली बर्फ की चादर से लकदक है। सुबह और शाम के साथ रात का तामपान शून्य से नीचे चल रहा है। ऐसे में अभी दो हफ्ते तक माता की नियमित पूजा नहीं हो पाएगी। उल्लेखनीय है कि माता बूढ़ी नागनि लोगों को जहां सुख-शांति व समृद्धि देती है, वहीं गोरक्षा भी करती है। गर्मी के मौसम में यहां पर्यटकों का भी तांता लगा रहेगा।
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