अमर उजाला ब्यूरो
कुल्लू। फलों के लिए मशहूर कुल्लू घाटी में नवंबर माह में हुई बर्फबारी से बागवानों के साथ बागवानी विभाग भी गदगद है। बर्फबारी और बारिश के बाद बागवानी विभाग ने बागवानों को अब बागवानी संबंधी कार्य शुरू करने की सलाह दी है। सेब का नया बगीचा तैयार करने के लिए गड्ढे तथा तौलिये बनाने का काम शुरू करने को कहा है।
खेत खलिहानों में पर्याप्त नमी होने से बागवानी विशेषज्ञ ने अब मौसम बगीचों के लिए अनुकूल बताया है। नवंबर माह में हुई बर्फबारी सेब सहित अन्य फलों के लिए वरदान मानी है। जिला कुल्लू में करीब 70 हजार परिवार लगभग 27 हजार हेक्टेयर भूमि पर सेब का उत्पादन करते हैं। घाटी के लोगों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए बागवानी की अहम भूमिका है। बागवान हंस राज, धर्म सिंह, किशोरी लाल, पन्ना लाल, केहर सिंह, अनूप राम, बेली राम, सीमा ठाकुर, रमेश तथा हीरा लाल ने कहा कि सेब के बगीचों में उचित नमी आ गई है। ऐसे में बागवान भी तौलिया बनाने में जुट गए हैं। साथ ही नए पौधों को लगाने के लिए गड्ढे भी बनाए जा रहे हैं। कहा कि घाटी में हुई बर्फबारी से बागवानों में खुशी का माहौल है। बागवानी उपनिदेशक कुल्लू डॉ. राज कुमार शर्मा ने कहा कि बर्फबारी व बारिश के बाद लोग बागवानी कार्य शुरू कर सकते हैं। सर्दियों में फल पौधों को सूर्य की तेज किरणों से होने वाले घावों से बचाने के लिए 30 किलोग्राम चूना को 500 ग्राम नीला थोथा तथा 500 मिली अलसी के तेल का 100 लीटर पानी में घोल बनाएं। इसका सेब के तने पर दो से तीन फीट ऊंचाई तक लेप लगाने की सलाह दी है। उन्होंने हाल ही में हुई बर्फबारी को सेब के लिए बेहतरीन बताया है।