सैंज के मनोरम स्थल पर्यटकों से कोसों दूर
पर्यटन की दृष्टि से पिछड़ रही सैंज घाटी
बरमोट बन सकता है पैराग्लाइडिंग प्वाइंट
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूली (कुल्लू)। सैंज घाटी में कई मनोरम पर्यटन स्थल हैं, लेकिन ये पर्यटकों से कोसों दूर हैं। अगर इन स्थानों को पर्यटन के तौर पर विकसित किया जाए तो यहां पर साल भर पर्यटन गतिविधियां बनी रहेंगी। लेकिन, सैंज घाटी पर्यटन की दृष्टि से पिछड़ रही है। हालांकि, मनु ऋषि मंदिर, तलियारा कोठी, तुंग गांव के लिए हाल ही में तीन सौ सीढ़ियों का निर्माण किया गया है।
स्थानीय निवासी माघू राम, मालती देवी, आलम चंद, ठाकुर दत्त, मोती राम, प्रेम सिंह ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से सैंज घाटी का क्षेत्र काफी पिछड़ा हुआ है। यहां पर पर्यटन की गतिविधियां नाममात्र की हैं। उन्होंने कहा कि देश के कई गांवों को रोशन करने वाली बिजली सैंज घाटी में ही पैदा हो रही है। इसके अलावा यहां पर कई मनोरम स्थल हैं, जो पर्यटकों से कोसों दूर हैं। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण पर्यटक यहां पर पहुंच ही नहीं पाते हैं। बरमोट नामक जगह में पैराग्लाइडिंग की जा सकती है। पैराग्लाइडिंग शुरू होने से मनाली के सोलंगनाला की तर्ज पर सैलानी यहां पर पैराग्लाइडिंग का लुत्फ ले सकते हैं, लेकिन यह जगह सरकार और प्रशासन की अनदेखी का शिकार हैं। सरकार शांघड़, शैंशर सहित अन्य पर्यटन स्थलों की ओर ध्यान दे तो यहां के युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे। बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी ने कहा कि सैंज घाटी में पर्यटन की संभावनाओं को तलाश किया जाएगा। इस संबंध में सरकार को भी अवगत करवाया जाएगा। वहीं, जिला पर्यटन अधिकारी बीसी नेगी ने कहा कि विभाग अनछुए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए प्रयासरत है। मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होने पर उक्त क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।